
📰 विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
दिनांक – 09 नवम्बर 2025
कुशीनगर जनपद के तहसील तमकुहीराज क्षेत्र की ग्रामसभा कुबेरा भुआलपट्टी में लेखपालों की लापरवाही और राजस्व विभाग की चुप्पी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “जनसुनवाई व्यवस्था” की साख पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
जहां मुख्यमंत्री स्वयं “जनता दर्शन” में जनता की समस्याओं को सुनकर अधिकारियों को कठोर कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, वहीं राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़ों को संरक्षण देकर सरकार की नीतियों की खुली अवहेलना कर रहे हैं।
⚖️ ग्रामसभा की ज़मीन पर कब्ज़ा, लेखपाल की फर्जी आख्या ने बढ़ाया विवाद
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामसभा कुबेरा भुआलपट्टी की गाटा संख्या 32/34, जो राजस्व अभिलेखों में “नवीन परती भूमि” के नाम से दर्ज है, उस पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्ज़ा कर लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार तहसील स्तर से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक शिकायतें कीं, लेकिन लेखपाल ने अपनी आख्या रिपोर्ट में गलत तथ्य दर्शाए, जिसमें लिखा गया कि “11 लोगों को पट्टा दिया गया है और वे अपने-अपने हिस्से पर काबिज हैं।”
ग्रामीणों ने इस रिपोर्ट को “फर्जी, भ्रामक और भ्रष्टाचारपूर्ण” बताया है। उनका कहना है कि लेखपाल ने सच्चाई छिपाकर सरकारी भूमि को निजी संपत्ति के रूप में प्रस्तुत किया, जो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 व 122-बी के तहत गंभीर अपराध है।
🔹 धारा 67 — किसी भी व्यक्ति द्वारा ग्रामसभा की भूमि पर कब्जा या अतिक्रमण करना दंडनीय अपराध है।
🔹 धारा 122-बी — अवैध कब्जाधारियों से भूमि खाली कराने का अधिकार उपजिलाधिकारी को प्राप्त है, साथ ही आर्थिक दंड और गिरफ्तारी दोनों का प्रावधान है।
⚖️ उच्च न्यायालय के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय (इलाहाबाद) ने अपने कई आदेशों में स्पष्ट किया है कि ग्रामसभा की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्ज़ा या पट्टा वितरण कानूनन अमान्य है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राजस्व अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि ग्राम समाज की संपत्ति सुरक्षित रहे और अवैध कब्जों पर तत्काल कार्रवाई हो।
लेकिन कुबेरा भुआलपट्टी में न तो इन आदेशों का पालन हुआ, न ही राजस्व अधिकारियों ने कोई वास्तविक निरीक्षण किया। यही कारण है कि अब जनता मुख्यमंत्री से न्याय की आस लगाए बैठी है।
🚨 मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश — “भ्रष्टाचार करने वालों की खैर नहीं”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन और जनसुनवाई पोर्टल पर बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सभी जिलों को निर्देशित किया है कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा है —
“जो अधिकारी या कर्मचारी गलत रिपोर्ट बनाकर जनता को गुमराह करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जनहित के मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
इस आदेश के तहत प्रदेश के सभी मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और तहसीलदारों को स्थलीय निरीक्षण कर सत्य स्थिति का निर्धारण करने और हर हाल में समस्या का समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
🕵️♂️ जनता के सवाल — आदेश तो सख्त हैं, पर क्या धरातल पर उतरेंगे?
ग्रामसभा कुबेरा भुआलपट्टी के स्थानीय निवासी बताते हैं कि शिकायतों के बावजूद लेखपाल की फर्जी रिपोर्ट पर ही उच्च अधिकारियों की कार्यवाही आगे बढ़ रही है।
धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि —
“सरकार की नीतियाँ बहुत अच्छी हैं, लेकिन अधीनस्थ अफसरों की उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता को राहत नहीं मिल पा रही। जब तक जमीनी स्तर के कर्मचारी नहीं सुधरेंगे, तब तक मुख्यमंत्री के आदेश बेअसर रहेंगे।”
अब जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख के बाद राजस्व विभाग की गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और ग्रामसभा की ज़मीन फिर से अपने वास्तविक स्वरूप में लौटेगी।
⚔️ विलेज फास्ट टाइम्स की राय
राजस्व विभाग की यह लापरवाही केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से विश्वासघात है।
जब ग्रामसभा की भूमि — जो गरीबों, भूमिहीनों और सामुदायिक उपयोग के लिए होती है — पर कब्जा हो जाए और अधिकारी आंख मूंद लें, तो यह लोकतंत्र की जड़ों पर चोट है।
अब सवाल उठता है —
“क्या सरकार के आदेश सिर्फ कागज़ों में रहेंगे, या सच में ‘कानून का राज’ स्थापित होगा?”
जनता की निगाहें अब मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं।
अगर कार्रवाई हुई — तो यह प्रदेश में राजस्व सुधार का नया अध्याय साबित होगा।
अगर नहीं — तो जनता का यह सवाल गूंजेगा:
“क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है?”
