


विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर।
जनपद के राजा पाण्डेय (राजापाकड़) बिजली घर से कोटवा बाजार तक लगभग एक दशक पूर्व दौड़ाई गई 33 हजार वोल्ट की हाई वोल्टेज विद्युत लाइन आज रहस्यमय ढंग से पूरी तरह गायब है। चौंकाने वाली बात यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से लगे महंगे तार और पोल हटाए जाने के बावजूद न तो कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक हुआ और न ही बिजली विभाग अब तक स्थिति स्पष्ट कर सका है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा-ए-सरेआम है कि तत्कालीन जूनियर इंजीनियर ने बिना किसी उच्चाधिकारी के लिखित आदेश के पोल से तार उतरवाकर बेच दिए और पूरी धनराशि खुद ही डकार ली। हालांकि इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है, लेकिन जिस तरह से पूरी 33 केवी लाइन को जड़ से खत्म कर दिया गया, वह गंभीर संदेह पैदा करता है।
बताया जाता है कि जब राजापाकड़ बिजली घर से कोटवा बाजार तक 33 केवी लाइन बिछाई गई थी, तब बिजली विभाग ने दावा किया था कि इससे क्षेत्र को निर्बाध और बेहतर विद्युत आपूर्ति मिलेगी। पहले पोल लगाए गए, फिर हाई वोल्टेज सप्लाई के लिए तार दौड़ाए गए। लेकिन कुछ वर्षों बाद न कोई सूचना दी गई, न कोई आदेश दिखाया गया—अचानक तार उतारे गए और फिर पोल तक उखाड़ लिए गए, मानो यह किसी सरकारी परियोजना नहीं बल्कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना आदेश 33 केवी लाइन हटाना क्या अपराध नहीं है? यदि इसे हटाने का आदेश था, तो वह किस अधिकारी ने दिया? और यदि आदेश नहीं था, तो फिर तार और पोल किसके निर्देश पर हटाए गए? हटाई गई सामग्री किस स्टोर में जमा की गई? किस स्टॉक रजिस्टर में उसकी एंट्री है? और किस अधिकारी ने रिसीव कर हस्ताक्षर किए?
जानकारों का कहना है कि यदि बिजली विभाग इन सवालों का जवाब देने में असमर्थ है, तो यह मामला सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की लूट का बनता है, जिसकी जिम्मेदारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर तय होनी चाहिए।
सूत्रों का दावा है कि बिजली विभाग के रिकॉर्ड में यह 33 केवी लाइन आज भी स्वीकृत और चालू दर्शाई जा रही है। यदि यह सच है, तो सवाल और गंभीर हो जाता है—क्या फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट के सहारे घोटाले को ढंका जा रहा है? क्या भुगतान की फाइलें आज भी इसी लाइन के नाम पर चल रही हैं?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर कब संज्ञान लेता है या फिर करोड़ों की यह हाई वोल्टेज फाइल भी कागजों में ही दौड़ती रहेगी।
