
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | 28 मार्च 2026
कुशीनगर जनपद के थाना कसया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेसारी गिदहा स्थित काली माता मंदिर में हुई पिण्डी तोड़फोड़ की घटना ने जहां स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत किया, वहीं पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने साफ कर दिया कि कानून अब सिर्फ कागजों में नहीं, ज़मीन पर भी सक्रिय है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 मार्च को शिकायतकर्ता रमाशंकर कुशवाहा द्वारा सूचना दी गई कि मंदिर में स्थापित सात पिण्डियों में से एक को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील था, लेकिन थाना कसया पुलिस ने इसे हल्के में लेने के बजाय तत्काल गंभीरता दिखाई।
पुलिस ने बिना समय गंवाए मुकदमा संख्या 189/2026, धारा 298 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की और महज़ कुछ घंटों के भीतर ही घटना में शामिल चार आरोपियों—विनोद चौहान, सन्नी गुप्ता, सूरज गौड़ और रोहित गौड़—को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार भी कर लिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी हरकत थी।
यह कार्रवाई उन लोगों के लिए करारा तमाचा है जो यह समझते हैं कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर माहौल बिगाड़ने के बाद वे आसानी से बच निकलेंगे। कसया पुलिस की यह तत्परता न सिर्फ सराहनीय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि इच्छा शक्ति हो, तो अपराधियों को पकड़ना कोई कठिन कार्य नहीं।
हालांकि, सवाल यह भी उठता है कि आखिर ऐसे तत्वों के हौसले इतने बुलंद क्यों हो रहे हैं? क्या यह सिर्फ कानून का डर खत्म होने का संकेत है या फिर समाज में बढ़ती असहिष्णुता का परिणाम?
फिलहाल, पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आस्था पर चोट करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
