
19 दिसम्बर | विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
जनपद कुशीनगर में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर सशक्त नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत पाँच दिवसीय कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य और सफल समापन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल खेती को रसायनमुक्त बनाने का संदेश लेकर आया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को कृषि क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए तैयार करने का सशक्त मंच भी बना।
उप कृषि निदेशक अतीन्द्र सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अब महिलाएँ ही खेतों को रसायनों के दुष्प्रभाव से मुक्त कर प्राकृतिक खेती की अगुवाई करेंगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत घटाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए वरदान साबित होगी।
इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद कुशीनगर के 14 विकास खंडों से चयनित 82 कृषि सखियों ने सक्रिय सहभागिता की। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी कृषि सखियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश्वर सिंह जी (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उप निदेशक कृषि अतीन्द्र सिंह उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि राजेश्वर सिंह जी ने महिलाओं में उद्यमिता विकास, कृषि उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएँ यदि संगठित होकर कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर ही बदल सकती है। उन्होंने कृषि सखियों को “ग्रामीण बदलाव की धुरी” बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में डॉ. पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधान, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, सरगटिया ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से सब्जी उत्पादन और बीज उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। वहीं डॉ. शमशेर सिंह, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, कुशीनगर ने जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने में केवीके की भूमिका और नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी साझा की।
पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. अरुण प्रताप सिंह ने प्रशिक्षण की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए पाँच दिनों की गतिविधियों, उपलब्धियों और सीखों से अतिथियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि सखियों को ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास से लैस करना रहा।
इस अवसर पर हरिशंकर नारायण (मास्टर ट्रेनर), बृजेश गोंड, श्रुति वी. सिंह, रिद्धि वर्मा, विशाल सिंह, मोतीलाल कुशवाहा, कृपा शंकर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन प्राकृतिक खेती के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जिले को रसायनमुक्त खेती की ओर अग्रसर करने के संकल्प के साथ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुशीनगर में हरित, स्वस्थ और समृद्ध कृषि भविष्य की मजबूत नींव बनकर उभरा। 🌱
