
24 दिसम्बर | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
कुशीनगर नगर पालिका परिषद हाटा में कराए गए एवं कराए जा रहे विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतों ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने सख्त रुख अपनाया है और मामले की निष्पक्ष व गहन जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस कार्रवाई को नगर निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह पूरा मामला वार्ड संख्या–23, नगर पालिका परिषद हाटा निवासी उगेश कुमार सिंह पुत्र मदन सिंह द्वारा दिनांक 03 दिसम्बर 2025 को प्रस्तुत प्रार्थना पत्र से जुड़ा है। शिकायत पत्र में नगर पालिका परिषद हाटा के विभिन्न कार्यों को लेकर कुल 11 बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विकास के नाम पर नियमों की अनदेखी की गई, गुणवत्ता से समझौता हुआ और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने बिना विलंब किए जांच समिति का गठन किया। गठित समिति में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ कोषाधिकारी, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खण्ड हाटा एवं अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग (निर्माण) कुशीनगर को सदस्य नामित किया गया है। यह समिति न केवल अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण करेगी, बल्कि मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण भी करेगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर पर्दा न रह सके।
जिलाधिकारी ने समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पत्रावलियों की विधिवत जांच कर एक सप्ताह के भीतर संयुक्त जांच आख्या प्रस्तुत की जाए। प्रशासन का कहना है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया गया तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई केवल हाटा नगर पालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी नगर निकायों को यह सख्त संदेश देने के लिए है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और उत्तरदायित्व से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच समिति के गठन से नगर पालिका के गलियारों में खलबली मची हुई है और आम जनता की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
