
— विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर विशेष रिपोर्ट —
कुशीनगर जनपद में पुलिस अधीक्षक द्वारा बड़े पैमाने पर ट्रांसफ़र-पोस्टिंग का तूफ़ान खड़ा कर दिया गया है। यह महज़ एक औपचारिक अदला-बदली नहीं, बल्कि थानों की कार्यशैली में नई ऊर्जा भरने, शिथिलता पर चोट करने और जनता के बीच ज़िम्मेदारी की लौ प्रज्वलित करने की निर्णायक पहल मानी जा रही है। आदेश के जारी होते ही पुलिस महकमे से लेकर आम जनता के बीच चर्चाओं का बाज़ार गर्म—“अब देखना, कौन वाक़ई मैदान में धूल झोंकता है!”
इस व्यापक बदलाव में निरीक्षक से उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारियों को जनहित में तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियाँ सौंप दी गईं। कई चर्चित नामों को संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण थानों में तैनाती मिली है—“काम करो या हटो” का संदेश साफ़-साफ़ पढ़ा जा सकता है।
निरीक्षक धनवीर सिंह को रामकोल का नया प्रभारी बनाते हुए जिम्मेदारी का कमान थमाया गया है, जबकि निरीक्षक आनन्द गुप्ता, विधाधर कुशवाहा, जतेन्द्र तिवारी, चंद्रभूषण प्रजापति, संजय दूबे और रमसहाय चौहान जैसे अनुभवी अधिकारियों को ऐसे स्थानों पर भेजा गया है जहाँ क़ानून-व्यवस्था की नब्ज़ पकड़ने की कला ही असली परीक्षा है।
उधर उपनिरीक्षक स्तर पर धीरेंद्र राय, विनय मिश्रा, दीपक सिंह, दिनेश कुमार, शरद भारती, प्रदीप राय, दिनेश साहनी, आजय पटेल, अखिलेश यादव समेत कई नाम उन थानों की कमान संभालेंगे जहाँ हर शिकायत जनता की धड़कन बनकर गूँजती है।
साइबर थाना, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, एंटी रोमियो टीम, शिकायत प्रकोष्ठ/जनसुनवाई, अपराध शाखा, सर्विलांस सेल जैसे संवेदनशील यूनिटों में भी नए चेहरों का आगमन, यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में ऑनलाइन अपराध से लेकर जमीनी विवादों तक—हर मोर्चे पर कार्रवाई की धार तेज़ होने वाली है।
पुलिस लाइन से लेकर तमकुहीराज, बरवापट्टी, हाटा, सेवरही, पटहेरवा, नेबुआ नौरंगिया, विशुनपुरा, कसया, पयटन तक—थानों के बोर्ड बदले हैं, लेकिन ज़िम्मेदारियों का वजन अब और भारी है।
जनता की नज़रें अब टिक गई हैं—
“कागज़ पर तबादले हुए… अब असली तस्वीर मैदान बताएगा।”
अगर यह फेरबदल काम और परिणाम की कसौटी पर खरा उतरता है, तो निश्चय ही कुशीनगर पुलिसिंग का नया अध्याय शुरू होने वाला है—जहाँ जिम्मेदारियाँ नहीं निभाई जातीं, निभाई जाती हैं दृढ़ता के साथ।
✍ विशेष संवाददाता — विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
