
✍️ Village Fast Times News Network — स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट, नई दिल्ली
नई दिल्ली — राष्ट्रीय राजनीति के इतिहास में शायद पहली बार भूख और इंसानियत ने मिलकर इतना गूंजदार जवाब दिया है! भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर राजधानी दिल्ली में शुरू हुआ “अटल कैंटीन मिशन” सिर्फ एक योजना नहीं, गरीब की थाली में सम्मान और पेट में उम्मीद भरने वाला संकल्प बनकर उभरा है।
लाजपत नगर में सीएम रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों उद्घाटन होते ही भीड़ इस कदर उमड़ी कि भीड़ नहीं, विश्वास उमड़ता दिखा! 5 रुपये — जी हाँ, सिर्फ 5 रुपये में दाल, चावल, रोटी और सब्जी… और सबसे ऊपर गरम तवे से उठती वह खुशबू, जो पेट से ज्यादा दिल को तृप्त करती है। कतारों में खड़े लाेगों के शब्द गूँजते रहे —
“थाली छोटी सही… उम्मीद बड़ी है!”
“आज खाना नहीं — सम्मान मिला है!”
100 अटल कैंटीनों का यह मेगा मिशन सिर्फ भूख नहीं, बेरोज़गारी पर भी प्रहार है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक लगभग 700 युवाओं को रोज़गार, यानी थाली में रोटी और हाथों में काम — दोनों का आश्वासन!
गुणवत्ता को लेकर सरकार सख़्त — CCTV निगरानी, एफएसएसएआई टेस्टिंग और हाईजीन प्रोटोकॉल अनिवार्य। रसोई में चूहे नहीं — नियम चलेंगे! यही वजह है कि अटल का नाम सिर्फ बोर्ड पर नहीं, हर निवाले में महसूस होगा।
⏰ जनता के समय के मुताबिक मज़बूत शेड्यूल:
दोपहर: 11:30 AM – 2 PM
रात: 6:30 PM – 9 PM
सड़क किनारे उस कैंटीन के बाहर खड़े एक बूढ़े मज़दूर ने हमारी टीम से कहा —
“बेटा, ये सिर्फ खाना नहीं… आज अटल फिर ज़िंदा लग रहे हैं।”
Village Fast Times की रिपोर्ट कहती है —
“यह 5 रुपये की थाली नहीं, यह सत्ता को आईना है!
यहाँ भाषण नहीं — थालियाँ बोल रही हैं!”
दिल्ली की सर्दियों में यह पहल अटल की कविताओं जैसी गर्मी लेकर आई है —
किसी के पेट में रोटी बनकर, किसी के सपनों में हौसला बनकर… और किसी के आत्मसम्मान में रोशनी बनकर।
–– विलेज फास्ट टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क, नई दिल्ली

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