

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
विशेष संवाददाता की खास रिपोर्ट
कसया एयरपोर्ट की जमीन पर वर्षों से जमे अवैध कब्जेदारों के खिलाफ आखिरकार प्रशासन का बुलडोज़र न्याय गरज उठा। सोमवार सुबह होते ही नगरपालिका परिषद की टीम, भारी पुलिस बल व प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। चेतावनियों और नोटिसों के बाद भी कब्जाधारियों द्वारा नहीं हटाए गए निर्माणों को नगरपालिका द्बारा जमीदोज़ कर दिया गया। कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था, ताकि किसी भी तरह की अराजकता, विरोध या हुड़दंग की गुंजाइश न बचे।
नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने बताया— “सरकारी भूमि पर कब्जा कर निजी महलों की बुनियाद रखने वालों को अब यह समझना होगा कि कानून की सीमाओं से बाहर कोई नहीं। नोटिस देना हमारी मजबूरी थी, कार्रवाई करना हमारी जिम्मेदारी।”
उधर मौके पर मौजूद क्षेत्राधिकारी ने सख्त शब्दों में कहा— “कसया एयरपोर्ट की जमीन पर एक-एक इंच की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। कब्जा हटाने में यदि और नाम सामने आए, तो उनके खिलाफ भी कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। प्रशासन की नीयत और नीति दोनों स्पष्ट हैं—जो अवैध है, वह बचेगा नहीं।”
स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई की खूब चर्चा रही। कई लोगों का कहना था कि बीते वर्षों में ढिलाई, राजनीतिक रसूख और विभागीय सुस्ती के कारण अवैध निर्माणों को पनपने का मौका मिला। लेकिन इस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर ‘घर’ नहीं, ‘गुनाह’ खड़ा होता है, और इसकी कीमत आखिरकार चुकानी पड़ती ही है।
नगरपालिका कर्मियों ने भारी मशीनरी की मदद से दीवारें, पिलर, दुकानों के शेड और अस्थायी निर्माणों को एक के बाद एक ढहा दिया। प्रशासन की सख्ती इतनी स्पष्ट थी कि कार्रवाई शुरू होते ही कई कब्जाधारी खुद सामान हटाने में जुट गए, ताकि नुकसान कम हो सके।
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर की ये रिपोर्ट केवल कार्रवाई की तस्वीर नहीं दिखाती, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों की गूंज भी है।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है—यह देखना दिलचस्प होगा कि केवल बुलडोज़र की गर्जना तक कार्रवाई सीमित रहती है या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा स्थायी समाधान, जवाबदेही तय करने और दोबारा कब्जा रोकने की दिशा में भी कठोर कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल कसया एयरपोर्ट की जमीन ने राहत की सांस ली है—और अवैध कब्जाधारियों को एक स्पष्ट संदेश— कानून की रफ़्तार धीमी हो सकती है, पर लौटकर आती जरूर है।
