

30 दिसम्बर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर।
कुशीनगर में ठंड ने जैसे आसमान से बरसते कोहरों की चादर ओढ़ ली हो—हड्डियाँ चटकाने वाली शीतलहर और कसकती सर्द हवाओं के बीच जिला प्रशासन आज आमजन की पीड़ा सुनने के लिए खुद मैदान में उतर आया। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने कलेक्ट्रेट सभागार में संयुक्त जनता दर्शन का आयोजन किया, जहाँ दर्जनों फरियादी उम्मीद की आख़िरी डोर थामे पहुँचे।
सभागार में सुबह से ही ऐसा माहौल रहा, मानो जनता के दुख-दर्द का लेखा-जोखा यहीं तय होना हो। डीएम-एसपी ने एक-एक शिकायत को गंभीरता से सुना—किसी ने इलाज न मिलने की व्यथा सुनाई, तो कोई आवास-पेंशन की समस्या लेकर पहुँचा। कहीं ज़मीन पर कब्ज़े की पुकार थी तो कहीं प्रशासनिक कार्यवाही की देरी से टूटा विश्वास… लेकिन आज उम्मीद की लौ बुझने नहीं दी गई। जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए—
“समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील ढंग से हो—किसी भी हाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं!”
शीतलहर की मार झेल रहे गरीब, वृद्ध और दिहाड़ी मज़दूरों की बात आते ही डीएम के तेवर और सख्त हो गए। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि
“जिन घरों में भूख, ठंड और बेबसी दस्तक दे रही है—वहीं से आपकी जिम्मेदारी शुरू होती है। जरूरतमंदों तक राहत, कंबल और सहायता प्राथमिकता से पहुँचे।”
इस दौरान पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने साफ कहा—
“कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा से समझौता नहीं होगा। शिकायतें सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर हल हों—यही पुलिस की असली परीक्षा है।”
जनता दर्शन के माध्यम से प्रशासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ—यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भरोसे का पुल साबित हुआ। फरियादियों ने खुलकर अपनी बात कही और अधिकारियों ने मौके पर ही कई प्रकरणों में कार्रवाई शुरू कर दी।
सभागार में मौजूद विभागीय अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश मिला—
“जनहित सर्वोपरि है, संवेदनशीलता प्रशासन की पहचान है, और समाधान ही शासन की असली सफलता!”
ठंडी हवाओं के बीच यह जनता दर्शन साबित कर गया कि जब प्रशासन जागता है… तो उम्मीद रंग लाती है।
जनता के चेहरे पर लौटती उम्मीद बताती है—कुशीनगर प्रशासन अब सर्द मौसम में भी गर्मजोशी से काम पर है!
