
07 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
“कानून है, चेतावनी है और अब जागरूकता भी—फिर भी बाल विवाह?” इसी कटाक्षी सवाल के साथ जनपद कुशीनगर में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एक सशक्त और असरदार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कुशीनगर के सभागार में हुए इस कार्यक्रम ने साफ संदेश दिया कि अब चुप्पी नहीं, शिकायत अनिवार्य है।
जिला प्रोवेशन अधिकारी डी.सी. त्रिपाठी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की मंशा केवल योजनाएं चलाने की नहीं, बल्कि बाल विवाह की मानसिकता को जड़ से खत्म करने की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं होगी।
कार्यक्रम में हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन टीम के डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर नलिन सिंह ने छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “कम उम्र की शादी केवल भविष्य नहीं, पीढ़ियों को बर्बाद करती है।” छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से जुड़े मानस मिश्रा ने दो टूक कहा—“अगर आसपास कहीं भी कानून तोड़ा जा रहा है, तो चुप रहना भी अपराध को बढ़ावा देना है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़का 21 वर्ष और लड़की 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह अपराध है, जिसकी सूचना 1098 पर देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
महिला कल्याण विभाग की जेंडर स्पेशलिस्ट प्रीती सिंह ने निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) जैसी योजनाओं की जानकारी देकर बताया कि सरकार बेटियों के साथ खड़ी है—बशर्ते समाज साथ दे।
वहीं वन स्टॉप सेंटर की सेंटर मैनेजर रीता यादव और जेंडर स्पेशलिस्ट बंदना कुशवाहा ने 1098, 181, 1090, 112, 108 व 102 हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता बताकर यह साफ कर दिया कि सहायता एक कॉल दूर है।
कार्यक्रम में सेंटर प्रभारी विभाकर मिश्रा सहित सैकड़ों प्रशिक्षु उपस्थित रहे। समापन पर नलिन सिंह ने सभी को बाल विवाह न करने और रोकने की शपथ दिलाई।

अंत में एक स्वर में नारा गूंजा—“कुशीनगर ने ठाना है, बाल विवाह मुक्त जनपद बनाना है।”अब सवाल सिर्फ जागरूकता का नहीं, जवाबदेही का है।



