
07 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को गति देने और जनपद में निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति–2022 को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश पर इस महत्वाकांक्षी नीति के प्रमुख प्रावधानों का जनपद स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार तेज कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी इसका लाभ उठा सकें।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह नीति केवल पोल्ट्री उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और निर्यात संवर्धन का मजबूत आधार तैयार करती है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि निवेश इच्छुक उद्यमियों को हर स्तर पर मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि योजनाएं फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर स्पष्ट परिणाम दिखें।
उपायुक्त उद्योग अभय कुमार सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि नीति के तहत आगामी पांच वर्षों में लगभग 1500 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत कमर्शियल लेयर फार्म, ब्रायलर पैरेंट फार्म एवं अन्य पोल्ट्री इकाइयों की स्थापना पर ब्याज सब्सिडी, बैंक ऋण पर पांच वर्ष तक 7 प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति, नई इकाइयों को 10 वर्षों तक 100 प्रतिशत विद्युत शुल्क छूट तथा भूमि क्रय या लीज पर पूर्ण स्टाम्प ड्यूटी छूट जैसी आकर्षक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि उद्यमियों की सुविधा के लिए डेडिकेटेड पोर्टल, डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम और प्रोजेक्ट फैसिलिटेशन सेंटर की व्यवस्था की गई है, जिससे निवेश प्रक्रिया पारदर्शी और सरल हो सके। पात्र लाभार्थी निवेश मित्र पोर्टल
पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, कुशीनगर से सीधे संपर्क कर सकते हैं।
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर का मानना है कि यदि जिला प्रशासन, उद्योग विभाग और स्थानीय उद्यमी मिलकर इस नीति को गंभीरता से लागू करें, तो कुशीनगर जनपद पोल्ट्री सेक्टर में एक नई पहचान बना सकता है। अब जिम्मेदारी तय है—प्रशासन को सक्रिय मार्गदर्शन देना होगा और उद्यमियों को अवसर का लाभ उठाकर रोजगार सृजन में सहभागी बनना होगा। यही इस नीति की वास्तविक सफलता होगी।

