
कुशीनगर जनपद की तमकुहीराज तहसील अंतर्गत छपरा अहिरौली कर क्षेत्र में निजामुद्दीन अंसारी के खेत, सरिया खुर्द तथा जुड़वा बाबा के समीप अवैध खनन बेखौफ जारी है। दिन-रात चल रहे ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर कानून किसके लिए बना है? प्रशासन की चुप्पी ने अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। परिणामस्वरूप न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है, बल्कि सरकारी नियम-कानून भी खुलेआम रौंदे जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन माफिया खेतों, नालों और सार्वजनिक भूमि को खोखला कर रहे हैं। जमीन धँसने लगी है, जलस्तर प्रभावित हो रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर सकता है। बावजूद इसके, ट्विटर अकाउंट पर शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने खनन अधिकारी को फोन पर भी अवगत कराया, परंतु इसके बाद भी आधिकारिक स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या शिकायतें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं? क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है? जब आम नागरिक नियमों का पालन करता है, तो अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? ग्रामीणों में आक्रोश है और वे यह जानना चाहते हैं कि जिम्मेदार अफसर आखिर किस दबाव में मौन साधे हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, उक्त प्रकरण के संबंध में खनन अधिकारी को प्रभावी कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह निर्देश जमीन पर उतरते हैं या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाते हैं। जनता पूछ रही है—क्या सिर्फ आदेश जारी कर देना ही कर्तव्य की इतिश्री है, या दोषियों पर कठोर कार्रवाई भी होगी?
यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि कानून ताकतवरों के सामने बेबस है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह दिखावे से ऊपर उठकर वास्तविक कार्रवाई करे, मशीनें सीज हों, दोषियों पर मुकदमा दर्ज हो और पर्यावरण को बचाने का ठोस प्रयास दिखाई दे। वरना आने वाली पीढ़ियाँ यही पूछेंगी—जब धरती लूटी जा रही थी, तब जिम्मेदार अफसर कहाँ थे?

