
30 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
विशेष संवाददाता
जनपद कुशीनगर में गोबरधन परियोजना के अंतर्गत निर्मित बायोगैस प्लांट की बदहाल स्थिति को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने संबंधित फर्म को स्पष्ट चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है कि बायोगैस प्लांट में पाई गई सभी तकनीकी एवं कार्यात्मक कमियों को एक सप्ताह के भीतर दूर कर प्लांट को पूर्ण रूप से संचालित किया जाए, अन्यथा कठोर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
दिनांक 08 जनवरी 2026 को आयोजित जिला स्वच्छता समिति की बैठक में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि गोबरधन परियोजना के तहत निर्मित बायोगैस प्लांट विभिन्न खामियों के कारण अक्रियाशील है। बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा संबंधित फर्म को आमंत्रित किया गया था ताकि वह अपना पक्ष रख सके, किंतु फर्म का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसे प्रशासन ने लापरवाही की श्रेणी में माना।
पूर्व में गठित जांच समिति की रिपोर्ट ने परियोजना की खामियों को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार बायोगैस प्लांट के आउटलेट से स्लरी निकलने में अवरोध, गैस होल्डर डोम का असंतुलन, गैस क्लीनिंग सिस्टम का खराब होना, पुराने जनरेटर का उपयोग, तथा निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण न होना जैसी गंभीर तकनीकी कमियां पाई गई हैं। इन्हीं कारणों से प्लांट का नियमित संचालन बाधित है और योजना के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे।
जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि गोबरधन परियोजना केंद्र सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसकी नियमित समीक्षा उच्च स्तर पर होती है। ऐसी स्थिति में परियोजना के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही कदापि स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं में शिथिलता न केवल जनहित के विरुद्ध है, बल्कि शासन की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने संबंधित फर्म को अंतिम अवसर देते हुए निर्देशित किया है कि वह एक सप्ताह के भीतर सभी कमियों का निराकरण कर बायोगैस प्लांट को पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाए। निर्धारित अवधि में सुधार न होने की स्थिति में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित फर्म की होगी।
जिला प्रशासन की इस कड़ी चेतावनी से स्पष्ट है कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
