


विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर जनपद के दुदही नगर पंचायत में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां लाखों रुपये की लागत से एक नया आंगनबाड़ी केंद्र तो बना दिया गया, लेकिन केंद्र तक पहुंचने के लिए आज तक कोई समुचित रास्ता नहीं बनाया गया। यही कारण है कि यह आंगनबाड़ी केंद्र अब विकास के बजाय अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र के चारों ओर कूड़े, झाड़ियों और खंडहरनुमा माहौल का अंबार लगा हुआ है। केंद्र परिसर में पेयजल के लिए लगाया गया नल भी खराब पड़ा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए बनाए गए इस केंद्र तक पहुंचना जोखिम भरा हो गया है। कच्चे, उबड़-खाबड़ रास्तों और कीचड़ से होकर गुजरना मजबूरी बन गया है, जिससे लाभार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भवन बाहर से भले ही आकर्षक दिखाई देता हो, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। बिना संपर्क मार्ग के इस केंद्र का निर्माण कराना नगर पंचायत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा गया और जल्दबाजी में केवल कागजी खानापूर्ति कर दी गई।
इस मामले को लेकर क्षेत्र में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब तक मूलभूत सुविधाएं, जैसे पक्का रास्ता, साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक आंगनबाड़ी केंद्र का उद्देश्य ही अधूरा रहेगा। वहीं सूत्रों के अनुसार, शिकायतों के बाद तहसील स्तर से जांच टीम के मौके पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों और फोटो तक सीमित रह गई हैं? जब लाभार्थियों तक योजना का लाभ ही नहीं पहुंच पा रहा, तो फिर ऐसे निर्माण कार्यों का औचित्य क्या है? अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब और क्या कदम उठाते हैं, या फिर यह आंगनबाड़ी केंद्र यूं ही अव्यवस्थाओं के बीच अपनी बदहाली की कहानी कहता रहेगा।
