

विलेज फास्ट टाइम्स से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर। प्रशासनिक गलियारों में गुरुवार को उस समय खलबली मच गई, जब अजय राय, अपर आयुक्त (न्यायिक), गोरखपुर ने बिना पूर्व सूचना तमकुहीराज तहसील का औचक निरीक्षण कर दिया। निरीक्षण की खबर लगते ही दफ्तरों में फाइलों की धूल झाड़ने की हड़बड़ी और कुर्सियों पर अचानक सक्रियता साफ दिखाई दी—मानो वर्षों से सोई व्यवस्था को किसी ने झकझोर कर जगा दिया हो।
अपर आयुक्त ने एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार न्यायालयों की फाइलों की गहन जांच की। कई वादों के वर्षों से लंबित रहने पर उन्होंने कड़ी नाराज़गी जताई। सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में अनावश्यक आपत्तियों और प्रक्रियात्मक पेचीदगियों का ऐसा जाल पाया गया, जिसने फरियादियों को न्याय से अधिक ‘प्रतीक्षा’ का अनुभव कराया। इस पर उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि न्यायालयीन कार्यवाही में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नामांतरण प्रकरणों में गैरजरूरी आपत्तियों को तत्काल हटाने के निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को राहत देना है, न कि उन्हें अंतहीन चक्कर कटवाना। संग्रह कार्यालय, मालखाना और कानूनगो कार्यालय का भी निरीक्षण किया गया, जहां अभिलेखों के रख-रखाव, लंबित प्रविष्टियों और कार्यप्रणाली की बारीकी से पड़ताल हुई।
निरीक्षण के दौरान तहसील कर्मियों में मचा हड़कंप चर्चा का विषय बना रहा। दबी ज़ुबान में फरियादियों ने भी अपनी पीड़ा रखी—कहीं सुनवाई की धीमी रफ्तार, तो कहीं फाइलों के ‘गायब’ होने की शिकायतें सामने आईं। अपर आयुक्त ने मौके पर ही त्वरित निस्तारण के सख्त निर्देश दिए और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेही का पाठ पढ़ाया।
कटाक्ष यही कि औचक निरीक्षण के कुछ घंटों में जो सक्रियता दिखी, यदि वही नियमित दिनों में भी बनी रहे तो शायद ‘लंबित’ शब्द राजस्व शब्दकोश से स्वतः ही लुप्त हो जाए। अपर आयुक्त ने सरकार की मंशा के अनुरूप वादकारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सख्त हिदायत दी और चेताया कि लापरवाही पर कठोर कार्रवाई तय है।
प्रशासनिक सख्ती की इस दस्तक ने एक संदेश तो साफ कर दिया—अब फाइलों की खामोशी नहीं, परिणामों की आवाज़ सुनी जाएगी।
