


विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से अमित कुमार कुशवाहा विषेश संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर जनपद के विशुनपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत दुदही नगर पंचायत के वार्ड नंबर 11 में विवादित भूमि पर हो रहा अवैध निर्माण अब एक गंभीर प्रशासनिक विफलता और न्यायिक आदेशों की खुलेआम अनदेखी का प्रतीक बन चुका है। न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जब जिम्मेदार तंत्र चुप्पी साध ले, तो आम नागरिक का भरोसा आखिर किस पर टिके? यही सवाल अब पूरे क्षेत्र में गूंज रहा है।
पीड़ित तूफानी चौहान, जो अपनी पत्नी के साथ अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं, आरोप लगाते हैं कि उनकी आराजी संख्या 1793/3 पर विपक्षी पक्ष द्वारा जबरन कब्जा कर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इस मामले में न्यायालय पहले ही उनके पक्ष में आदेश दे चुका है और प्रकरण अभी भी विचाराधीन है। इसके बावजूद निर्माण कार्य का जारी रहना न सिर्फ आदेश की अवहेलना है, बल्कि कानून व्यवस्था के मुंह पर तमाचा भी है।
चौहान का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। उनका कहना है कि कुशीनगर की तमकुहीराज तहसील में न्याय पाने के लिए अब “टावर मोबाइल” और धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है। बिशुनपुरा थाना क्षेत्र में न्याय के लिए दलालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे आम आदमी पूरी तरह टूट जाता है। उनका सीधा आरोप है कि तहसील भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कटाक्ष किया कि सत्ता में बैठी सरकार और जनप्रतिनिधि आंखें मूंदे हुए हैं, मानो आम जनता की पीड़ा से उनका कोई लेना-देना ही नहीं।
पीड़ित ने कई बार तहसील प्रशासन और स्थानीय पुलिस से शिकायत की। तहसीलदार ने मौके का निरीक्षण कर निर्माण रोकने के निर्देश भी दिए, लेकिन ये आदेश जमीन पर कहीं नजर नहीं आए। सवाल उठता है कि जब आदेश लागू ही नहीं होते, तो फिर ऐसे आदेशों का अस्तित्व किसलिए?
वहीं दूसरी ओर विपक्षी पक्ष के रामदयाल, नरथू और विश्वनाथ (पुत्रगण श्रीकिशन) का कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद बताया जा रहा है, वह उनकी नहीं है। उनका दावा है कि उनकी जमीन कहीं और स्थित है और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। हालांकि, इस दावे ने मामले को और उलझा दिया है।
पीड़ित दंपति के आमरण अनशन पर बैठने से क्षेत्र में तनाव का माहौल है। स्थानीय लोगों में भी आक्रोश पनप रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
यह प्रकरण अब प्रशासन की कार्यशैली और कानून व्यवस्था की साख पर सीधा सवाल है। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विवाद आने वाले समय में गंभीर रूप ले सकता है। जनता की नजरें अब प्रशासन पर टिकी हैं—देखना यह है कि न्याय धरातल पर उतरता है या फिर सिर्फ कागजों में ही कैद रह जाता है।
