
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के दुदही नगर पंचायत में जनस्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ जारी है। प्रशासन जहां एक ओर खुले में कूड़ा जलाने से बचने की अपील कर रहा है, वहीं दुदही नपं इस अपील को ठेंगा दिखाते हुए लोगों की जिंदगी को जहरीले धुएं में झोंकने पर आमादा दिख रही है। हाल ही में सेवरही स्थित ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल में जहरीले धुएं की चपेट में आने से बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना ने जिला प्रशासन को सतर्क जरूर किया, लेकिन दुदही में हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
नगर पंचायत दुदही द्वारा सीएचसी के पीछे गण्डक नहर की पटरी को खुलेआम कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। यहां सड़े-गले कूड़े के ढेर से उठने वाली दुर्गंध और लगातार जलते कूड़े से निकलने वाला जहरीला धुआं न केवल पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि मरीजों, नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। अस्पताल परिसर के समीप इस तरह की लापरवाही प्रशासनिक संवेदनहीनता की जीती-जागती मिसाल है।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब कूड़े में आग लगा दी जाती है। उठता हुआ काला धुआं पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेता है, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सीएचसी में भर्ती जच्चा-बच्चा, बुजुर्ग और अन्य मरीज इस जहरीले माहौल में इलाज कराने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और कई बार शिकायत व प्रदर्शन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार समस्या का समाधान खोजने के बजाय उच्चाधिकारियों को पत्र भेजने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी सस्ती लोकप्रियता से ऊपर उठकर ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, तो इस तरह की गंभीर समस्याओं का समाधान संभव है।
अब जबकि ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल की घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हुई है, दुदही की जनता को भी उम्मीद जगी है कि शायद इस बार उनकी आवाज सुनी जाएगी। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जनता के सब्र का बांध टूटने के कगार पर है—अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।
