
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
जनपद कुशीनगर में फर्जी अंकपत्र के जरिए नौकरी पाने का सनसनीखेज मामला सामने आने से शिक्षा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य फुलबदन कुशवाहा द्वारा जिलाधिकारी को भेजा गया पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल जांच की मांग की गई है।
पत्र के अनुसार, जनपद के एक इंटर कॉलेज में कार्यरत एक अध्यापक द्वारा कथित रूप से फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित शिक्षक ने गलत दस्तावेजों के जरिए न केवल नियुक्ति पाई, बल्कि लंबे समय से पद पर बने रहकर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह मामला सामने आते ही शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयोग सदस्य ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार का संकेत है। उन्होंने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लग सके।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने लंबे समय तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाला शिक्षक प्रशासन की नजरों से कैसे बचा रहा? क्या नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी गईं?
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अगर योग्य अभ्यर्थियों के हक पर इस तरह डाका डाला जाएगा, तो शिक्षा व्यवस्था पर से भरोसा उठना लाजिमी है।
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है। कुशीनगर में शिक्षा के नाम पर चल रहे इस कथित फर्जीवाड़े ने पूरे सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
