

विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के विशुनपुरा थाना क्षेत्र में इंसानियत एक बार फिर शर्मसार हुई, जब पुरानी रंजिश ने सड़क को ही जंग का मैदान बना दिया। पीड़िता राजेश यादव द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, 4 अप्रैल 2026 की शाम करीब 7 बजे गांव के ही कुछ दबंगों ने खुलेआम हमला बोल दिया। आरोप है कि मामूली कहासुनी को बहाना बनाकर पहले गाली-गलौज की गई और फिर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया।
बताया जा रहा है कि हमलावरों की संख्या तीन से चार थी, जिन्होंने बीच सड़क पर ही कानून की धज्जियां उड़ाते हुए पीड़ित को निशाना बनाया। हालात इतने बिगड़ गए कि जान बचाने की कोशिश में अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच एक संदिग्ध वाहन (नंबर BR22BP3078) भी मौके पर देखा गया, जिसने घटना को और भी रहस्यमयी बना दिया।
पीड़िता का आरोप है कि हमलावरों ने सिर और शरीर के कई हिस्सों पर वार किए, जिससे गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही गिर पड़े। स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी, लेकिन हमलावर बेखौफ अंदाज में फरार हो गए—जैसे उन्हें कानून का कोई डर ही न हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाएं यूं ही होती रहेंगी? क्या कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? पीड़िता ने मेडिकल रिपोर्ट के साथ पुलिस को तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस ‘दबंगई के तमाशे’ पर लगाम लगा पाता है या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि रंजिश की आग जब भड़कती है, तो इंसानियत राख हो जाती है—और कानून सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाता

कुशीनगर के विशुनपुरा में इंसाफ अब शायद पहचान पूछकर मिलता है! राजेश यादव को दबंगों ने पहले रास्ते में घेरा, फिर बेरहमी से पीटा और ऊपर से वाहन से टक्कर मार दी—मानो कानून को खुलेआम चुनौती दी गई हो। हैरानी की बात ये कि 6 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस की चुप्पी टूटने का नाम नहीं ले रही। ट्विटर पर शिकायत भी बेअसर साबित हुई। सवाल यही है—क्या न्याय अब रसूख और पहचान का गुलाम हो गया है, या फिर पीड़ित को अभी और “सबूत” देने होंगे कि वो सच में पीड़ित है?
