
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के दुदही क्षेत्र में 11 अप्रैल 2026 को प्रशासन ने “चुनिंदा एक्शन” का ऐसा नमूना पेश किया, जिसने कार्रवाई से ज्यादा सवालों को जन्म दे दिया। दर्जनों अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों की चर्चा पूरे इलाके में आम है, लेकिन कार्रवाई का दायरा सिर्फ एक केंद्र तक सीमित रहना—क्या यह कानून का पालन है या महज खानापूर्ति?
स्थानीय लोगों की मानें तो दुदही में लंबे समय से बिना मानक और नियमों के कई अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हो रहे हैं। ये केंद्र न सिर्फ स्वास्थ्य मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि शासन के सख्त नियमों को भी खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में प्रशासन का अचानक जागना और फिर केवल एक केंद्र पर कार्रवाई कर अपनी “जिम्मेदारी” पूरी मान लेना, व्यवस्था की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
कटाक्ष तो यह है कि जब अवैधता दर्जनों में हो, तो कार्रवाई एक पर क्यों? क्या बाकी केंद्रों को “अदृश्य लाइसेंस” मिल चुका है, या फिर यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे की फाइलों में दर्ज करने के लिए की गई? लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं यह “चयनात्मक सख्ती” किसी दबाव या सेटिंग का परिणाम तो नहीं।
प्रशासनिक सूत्र भले ही इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि बताने में जुटे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की आधी-अधूरी कार्रवाई सीधे-सीधे आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है। अवैध केंद्रों पर सख्त और व्यापक कार्रवाई की जगह प्रतीकात्मक कदम उठाना, कहीं न कहीं प्रशासन की नीयत और नीति दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब सवाल यही है—क्या यह “एक्शन” सच में अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए था, या फिर सिर्फ कागजी बहादुरी दिखाने का एक और अध्याय? अगर प्रशासन सच में गंभीर है, तो उसे चयनात्मक नहीं, व्यापक और निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी, वरना दुदही में अवैधता यूं ही फलती-फूलती रहेगी और जनता सिर्फ तमाशबीन बनी
