विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर दुदही क्षेत्र के लोटस पब्लिक स्कूल में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं प्रतिभा सम्मान समारोह ने शिक्षा, संस्कार और सम्मान की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पूरे इलाके में एक सकारात्मक संदेश छोड़ दिया। कार्यक्रम न सिर्फ भव्यता का प्रतीक बना, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को भी नए अंदाज में जीवंत कर गया।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पडरौना विधायक मनीष जायसवाल ने अपने संबोधन में शिक्षक की भूमिका को बेहद प्रभावशाली शब्दों में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वह प्रकाश स्तंभ है जो छात्रों के जीवन से अज्ञानता का अंधकार मिटाकर उन्हें सही दिशा दिखाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक सच्चा शिक्षक कभी कठोर तो कभी कोमल होता है, लेकिन उसके हर व्यवहार के पीछे छात्रों का उज्ज्वल भविष्य ही छिपा होता है। शिक्षक को उन्होंने सूर्य के तेज के समान बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से जीवन के हर संदेह स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्राचीन गुरुकुल परंपरा का भी जिक्र हुआ, जहां शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाई जाती थी। विधायक ने कहा कि उस दौर में राजा और रंक के बीच कोई भेदभाव नहीं था, सभी को समान शिक्षा और अनुशासन मिलता था। आज भले ही गुरु-शिष्य की जगह टीचर-स्टूडेंट शब्दों ने ले ली हो, लेकिन शिक्षा का मूल उद्देश्य और शिक्षक का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक और पूजनीय है।
विशिष्ट अतिथि अजीम आलम, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा के स्वरूप में परिवर्तन जरूर आया है, लेकिन शिक्षक का दायित्व और उसकी गरिमा कभी कम नहीं हुई। उन्होंने छात्रों को अनुशासन और संस्कार के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
विद्यालय के प्रबंधक शेषनाथ व्याहुत ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया, जिससे कार्यक्रम में पारंपरिक गरिमा और आत्मीयता का भाव और भी प्रबल हो उठा। मंच से मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा का संचार हुआ।
इस अवसर पर भरत गुप्ता, रमाशंकर गुप्ता, ध्रुव गुप्ता, राजन व्याहुत, मानकेश्वर गुप्ता, जैनुद्दीन अंसारी, सलामत अली, ओमप्रकाश कुशवाहा, पिंकी शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह ने यह साबित कर दिया कि अगर शिक्षा के साथ संस्कार जुड़ जाएं, तो हर विद्यार्थी समाज के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है। दुदही का यह आयोजन शिक्षा जगत में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।
