
कसया पुलिस को FIR और विवेचना का आदेश, CCTV से CDR तक खंगाले जाएंगे सुराग
कुशीनगर। विलेज फास्ट टाइम्स से विशेष संवाददाता।
कसया स्थित लूना हॉस्पिटल में दो जून 2026 को महिला नरगिस की मौत का मामला अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब चार महीने से कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कुशीनगर के आदेश ने न्याय की उम्मीद जगा दी है। न्यायालय ने कसया पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने का निर्देश दिया है। खास बात यह है कि जांच महज कागजी बयानों तक सीमित रहने वाली नहीं है। मामले में इलेक्ट्रॉनिक, चिकित्सकीय और अस्पताल से जुड़े रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लाने का निर्देश दिया गया है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि नरगिस की मौत से पहले अस्पताल में आखिर क्या हुआ था? ऑपरेशन थियेटर में कौन मौजूद था? एनेस्थीसिया किसने दिया? सर्जरी किसने की? और महिला की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल में क्या-क्या कदम उठाए गए?

सीसीटीवी खोलेगा अस्पताल के अंदर-बाहर का राज!
न्यायालय के आदेश में एक जून से दो जून 2026 तक की अस्पताल और आसपास की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर उसकी जांच किए जाने की बात सामने आई है। यही रिकॉर्डिंग अब इस मामले की सबसे अहम कड़ी बन सकती है।
कैमरों की फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि नरगिस अस्पताल कब पहुंचीं, कौन-कौन उनके साथ था, अस्पताल में कौन आया और कौन गया तथा ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद कौन-कौन लोग अस्पताल परिसर में मौजूद थे।
यानी अब कहानी केवल अस्पताल के दस्तावेजों और मौखिक दावों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि कैमरे भी जांच के अहम गवाह बन सकते हैं।
डॉक्टरों की CDR और लोकेशन भी जांच के घेरे में

मामले में संबंधित एनेस्थीसिया डॉक्टर और सर्जन के मोबाइल नंबरों की CDR तथा लोकेशन की जांच भी महत्वपूर्ण मानी गई है। इससे अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज चिकित्सकों की मौजूदगी और मोबाइल लोकेशन का मिलान किया जा सकता है।
अगर रिकॉर्ड में किसी डॉक्टर की मौजूदगी दर्ज है तो क्या उस समय उसकी मोबाइल लोकेशन भी वहीं थी? अस्पताल में कौन-कौन मौजूद था और किस समय पहुंचा? ऐसे सवालों के जवाब जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से तलाशे जाएंगे।
ऑपरेशन थियेटर में क्या हुआ था?
शिकायत के अनुसार नगर पालिका परिषद कसया के वार्ड संख्या-4 निवासी नरगिस पत्नी तसलीम को गाल ब्लैडर में पथरी की समस्या थी। बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें लूना हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों की ओर से आरोप लगाया गया कि ऑपरेशन की प्रक्रिया के दौरान उनकी हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई।
इसके बाद शिकायत में चिकित्सकीय प्रक्रिया, ऑपरेशन, एनेस्थीसिया, अस्पताल की व्यवस्था और आयुष्मान कार्ड से संबंधित लेनदेन को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन आरोपों की पुष्टि या खंडन अब पुलिस की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।
पोस्टमार्टम से आयुष्मान रिकॉर्ड तक खंगाले जाएंगे दस्तावेज
शिकायतकर्ता की ओर से न्यायालय के समक्ष नरगिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, स्वास्थ्य विभाग से संबंधित पत्राचार, मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से जुड़े दस्तावेज, आयुष्मान से संबंधित संदेश तथा पुलिस अधीक्षक को भेजी गई शिकायत की रजिस्ट्री रसीद सहित विभिन्न दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
अब जांच में इन दस्तावेजों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों की तस्वीर सामने आ सकती है, जबकि आयुष्मान से जुड़े रिकॉर्ड से उपचार और भुगतान संबंधी दावों की जांच का रास्ता खुल सकता है।
अब सवाल बड़ा है—जिम्मेदारी आखिर किसकी?
न्यायालय के आदेश के बाद मामला सिर्फ एक महिला की मौत की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह भी सामने आना बाकी है कि अस्पताल में निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं।
यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं तो उपलब्ध साक्ष्य तस्वीर साफ कर सकते हैं। लेकिन यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस विवेचना में जिन-जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनकी जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।

फिलहाल नरगिस मौत प्रकरण की गेंद अब कसया पुलिस के पाले में है। FIR से शुरू होने वाली विवेचना में CCTV फुटेज, CDR, मोबाइल लोकेशन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और आयुष्मान संबंधी दस्तावेज अहम कड़ी बन सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच यह तय करेगी कि नरगिस की मौत महज एक चिकित्सकीय घटना थी या इसके पीछे लापरवाही अथवा अन्य अनियमितताओं की कोई परत भी छिपी हुई है।
