
17 निरीक्षक-उपनिरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव—हाटा, तमकुहीराज, रामकोला, खड्डा, तुर्कपट्टी और रविंद्रनगर धूस को मिले नए प्रभारी; अब बदलेगी पुलिसिंग या सिर्फ बदलेंगे चेहरे?
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर, 06 अक्टूबर 2026।
कुशीनगर पुलिस महकमे में मंगलवार को एक बार फिर तबादलों का बड़ा दौर देखने को मिला। पुलिस अधीक्षक कुशीनगर की ओर से जारी आदेश में जनहित एवं प्रशासनिक हित का हवाला देते हुए 17 निरीक्षक एवं उपनिरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में तत्काल प्रभाव से बदलाव किया गया है। आदेश सामने आते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई और थानों की कई पुरानी तस्वीरें बदल गईं।
फेरबदल में अपराध शाखा, साइबर थाना, स्वाट टीम और आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण थानों की जिम्मेदारियां इधर से उधर की गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह बदलाव केवल पुलिस अधिकारियों की कुर्सियां बदलने तक सीमित रहेगा या फिर इसका असर अपराध नियंत्रण, फरियादियों की सुनवाई और थानों की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई देगा?
जारी आदेश के अनुसार निरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह को अपराध शाखा से प्रभारी निरीक्षक हाटा बनाया गया है। निरीक्षक अनिल सिंह यादव को अपराध शाखा से प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना तथा निरीक्षक महेन्द्र प्रजापति को अपराध शाखा से प्रभारी निरीक्षक चौरा खास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार सिंह को पुलिस लाइन भेजा गया है।
वहीं अपराध निरीक्षक तमकुहीराज अजय विक्रम यादव को अपराध शाखा में भेजा गया है। तुर्कपट्टी थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक आलोक कुमार और हाटा थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक दीपक सिंह को पुलिस लाइन भेजा गया है। चौरा खास थानाध्यक्ष दिनेश कुमार को तुर्कपट्टी की कमान दी गई है।
रामकोला थानाध्यक्ष चन्द्रभान सिंह अब तमकुहीराज की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि स्वाट टीम प्रभारी उपनिरीक्षक स्वतंत्र सिंह को रामकोला का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं उपनिरीक्षक अमित सिंह को रविंद्रनगर धूस थाने का प्रभारी बनाया गया है।
खड्डा थानाध्यक्ष संदीप सिंह को साइबर थाना, कुबेरस्थान थानाध्यक्ष महेश कुमार चौबे को खड्डा तथा हनुमानगंज थानाध्यक्ष अरुण सिंह को पडरौना भेजा गया है। पडरौना थानाध्यक्ष प्रविन्द्र राय को जनसुनवाई सेल की जिम्मेदारी मिली है। रविंद्रनगर धूस थानाध्यक्ष अनिल सिंह को कुबेरस्थान तथा उपनिरीक्षक विकास यादव को जनसुनवाई सेल भेजा गया है।
अब असली परीक्षा नई तैनाती पाए अधिकारियों की होगी। कुर्सी बदलना प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन जनता के लिए असली बदलाव तब माना जाएगा जब थानों के चक्कर कम हों, फरियाद पर कार्रवाई तेज हो और अपराधियों पर पुलिस की पकड़ मजबूत दिखाई दे।
कहने को चेहरे बदल गए हैं, अब देखना यह है कि व्यवस्था भी बदलती है या सिर्फ नेमप्लेट!
