
कुशीनगर
मा0 उपाध्यक्ष द्वारा बाढ़ से संबंधित तैयारियों का विभागवार ली गई जानकारी
अब बाढ़ के दृष्टिगत तहसील स्तर एवं जमीनी स्तर पर कार्य किए जाने पर दिया गया जोर*
खतरे वाले स्थानों पर बोर्ड लगाने एवं नदी नालों में बच्चों को नहाने/तैरने से रोकने हेतु जन जागरूकता पर दिया बल – उपाध्यक्ष
जिलाधिकारी द्वारा बाढ की तैयारियों से कराया गया अवगत
विषम परिस्थितियों हेतु माइक्रोप्लान अंतर्गत सभी व्यवस्थाएं कर ली गई है सुनिश्चित – डीएम

लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, पीवीएस, बीएसएम,मा0 उपाध्यक्ष (मुख्य सचिव स्तर) उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्षता एवं जिलाधिकारी की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ प्रबंधन संबंधी कार्यों के संबंध में विचार विमर्श संबंधित विभागाध्यक्षों के साथ आयोजित की गई।
मां0 उपाध्यक्ष द्वारा जनपद में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों, बांधों, की जानकारी संबंधित से लेने उपरांत जनपद स्तर से बाढ़ की तैयारियों की जानकारी सभी संबंधित से ली गई।
मां0 उपाध्यक्ष ने कहा कि जनपद स्तर की तैयारियां तभी कारगर हैं जब तहसील स्तर पर भी इतना ही प्रभावी हो उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर क्या कार्यवाही हुई है ये मायने रखता है, उन्होंने कहा कि प्रदेश में 118 तहसीलें व 2500 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, उन्होंने आज के नदी जल स्तर की जानकारी लेते हुए कहा कि बाल्मीकि नगर बैराज से पानी आने में भले ही 4 -5 घंटे लगे लेकिन सभी को जमीनी स्तर पर सदैव तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि बाढ़ खंड, स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग, पीडब्ल्यूडी आदि सभी को पता है कि उनके द्वारा क्या कार्य किया जाना है, परंतु मौसम और स्थिति की गंभीरता के दृष्टिगत कितनी संवेदनशीलता है ये मायने रखता है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से जितनी मौतें नहीं होती उससे अधिक बच्चों द्वारा नदी नालों में नहाने के दौरान डूबने से होती है, इसके लिए उन्होंने बच्चों एवं उनके अभिभावकों/टीचर के माध्यम से जागरूक किए जाने पर बल दिया गया साथ ही सभी ऐसे स्थानों पर बोर्ड लगाए जाने का निर्देश दिए गए जहां पर पानी अधिक है, या बहाव अधिक है, या जहां घटनाएं अधिक होती हैं। उन्होंने कहा कि बिजली गिरने की संभावना बने रहने के बावजूद भी लोग खेतों में काम करते हैं उन्हें जागरूक किए जाने हेतु निर्देशित किया गया। इस दौरान सर्प दंश से होने वाले मृत्यु के संबंध में जिलाधिकारी द्वारा बताया गया कि इसका प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक करने एवं सरकार द्वारा मिलने वाली राशि के संबंध में अवगत कराने का कार्य किया जा रहा है।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बाढ़ के दृष्टिगत तैयारियों के क्रम में अवगत कराया गया कि नदी उस पार के 12 गांवों जहां 06 गांव गैर आबाद हैं वहीं पर बाढ़ की संभावना बनी रहती है,जिसके स्थाई समाधान हेतु ग्रामवासियों को पट्टा आवंटित कर विस्थापित किए जाने की कार्यवाही के संबंध में अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि अभी नदी का डिस्चार्ज 97 हजार क्यूसेक है इस लिए की दिक्कत नहीं है फिर भी प्रशासन द्वारा पैनी नजर रखी जा रही है, उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों से समन्वय कर आपात स्थिति पर तत्काल कंट्रोल करने की कार्यवाही की जाती है,एवं माइक्रोप्लान अंतर्गत किस लेबल पर किसे संपर्क करना है सभी विभागों सहित ग्राम प्रधानों आदि का नम्बर रखा गया है।
जिलाधिकारी ने राहत शिविर, बाढ़ चौकियों, पर नियुक्त कार्मिकों, स्वास्थ्य विभाग द्वार चिकित्सकों की नियुक्ति एवं दवाओं की उपलब्धता, पशु पालकों हेतु भूसा चारे की व्यवस्था सहित आशाओं के माध्यम से तीन माह के अंदर होने वाली डिलेवरी, बाढ़ के दृष्टिगत, डीजल की उपलब्धता, विद्युत नहीं रहने पर जेनरेटर की व्यवस्था, कोटेदारों के माध्यम से राशन की उपलब्धता, शिक्षा विभाग द्वारा जर्जर विद्यालयों, विद्यालयों में जलभराव,चिन्हांकन, सहित सभी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी द्वारा सभी संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर आने वाले विषम परिस्थितियों से निपटने हेतु तैयारीयों से अवगत कराया गया ।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा,उप जिलाधिकारी खड्डा, तमकुहीराज, पीडी पीयूष, डीडीओ अरुण कुमार पाण्डेय, डीसी मनरेगा राकेश, बीएसए रामजियावन मौर्य, अधि0 अभि0 बाढ़ खंड, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई,विद्युत, सहित अन्य सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
