
रेलवे स्टेशन रोड पर ज़मीन को लेकर दो पक्षों में विवाद बढ़ा।
दोनों पक्षों ने ज़मीन पर अपना-अपना दावा किया। एक पक्ष का ज़मीन पर कब्ज़ा है,
जबकि दूसरा पक्ष कोर्ट में मामला लड़ रहा है। विवाद को लेकर तनातनी बढ़ गई है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
प्रशासन की चुप्पी पर स्थानीय लोगों में बेचैनी बढ़ी, शांतिपूर्ण समाधान की मांग को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है।
कुशीनगर जिले के पडरौना रेलवे स्टेशन रोड पर ज़मीन विवाद चर्चा में है। दो पक्षों के बीच तनातनी के कारण मामला न्यायालय और जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। स्थानीय लोग शांतिपूर्ण समाधान की मांग कर रहे हैं। प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
स्थानीय व्यापारी राजेश टीबेडवाल ने ज़मीन विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित ज़मीन पर उनका कब्ज़ा पूरी तरह वैध है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वर्ष 1977 में पडरौना राजदरबार परिवार से बैनामा लेकर ज़मीन खरीदी थी, जो लगभग पौने चार कठ्ठा है। राजेश टीबेडवाल ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष सुनियोजित साज़िश के तहत बेबुनियाद आरोप लगा रहा है और जनभावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनका ज़मीन पर वैध हक है और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई करने को तैयार हैं। राजेश टीबेडवाल ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मदरसा समिति का दावा है कि ज़मीन उनके नाम पर है और राजेश टीबेडवाल का कब्ज़ा अनाधिकृत है, वे ज़मीन के असली हकदार हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह विवाद अब सरकार बनाम मदरसा समिति के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। दोनों पक्ष अपने दावों को दस्तावेजों के आधार पर मजबूत करने में जुटे हैं। हाईकोर्ट ने पहले इस एक्ट को असंवैधानिक करार दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है और मदरसों में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी है।
जिला प्रशासन अलर्ट पर है, सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
ज़मीन विवाद की गूँज अब जिला प्रशासन तक पहुँच गई है, प्रशासनिक अधिकारी मामले की तहकीकात कर रहे हैं। कुशीनगर में भूमि विवादों की संख्या अधिक होने से शांति-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। प्रशासन अलर्ट पर है और स्थिति पर नजर रखे हुए है।
स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है, लोग ज़मीन विवाद के समाधान की मांग कर रहे हैं और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
रेलवे स्टेशन रोड के व्यस्त बाज़ार क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण यह विवाद स्थानीय व्यापारियों और आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए, ताकि अनावश्यक तनाव और विवाद की स्थिति पैदा न हो।
अब देखने वाली बात यह होगी कि अदालत में चल रही सुनवाई और जिला प्रशासन की कार्यवाही से इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है।
पडरौना व्यापारी राजेश टीबेडवाल ने ज़मीन विवाद में हल्का लेखपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लेखपाल पर पक्षपात का आरोप लगाया है और जांच की मांग की है।
कुशीनगर के पडरौना रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित एक ज़मीन को लेकर मदरसा समिति और व्यापारी राजेश टीबेडवाल के बीच विवाद चल रहा है। मदरसा समिति का दावा है कि ज़मीन उनके नाम पर है, जबकि राजेश टीबेडवाल कहते हैं कि उन्होंने यह ज़मीन वर्ष 1977 में पडरौना राजदरबार परिवार से खरीदी थी। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लेखपाल की संदिग्ध भूमिका ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर इस विवाद पर कब और कैसा निर्णय लेता है। दोनों पक्ष अपने दावों को दस्तावेजों के आधार पर मजबूत करने में जुटे हैं और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है ।

