
नई दिल्ली। देश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला यह मामला किसी हादसे से कम नहीं। एक ही झटके में 18 मासूम बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इन मौतों के पीछे दवाओं का गंदा खेल उजागर हुआ है — जहां मानवता को मुनाफे के तराजू पर तौला जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन बच्चों को जो सिरप दी गई, वह मानक परीक्षण में फेल थी। घटिया और जहरीली दवाएं बाज़ार में कैसे पहुंचीं, यह सवाल अब जनता के मन में आग की तरह धधक रहा है। सूत्रों के अनुसार, दवा कंपनियों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत के चलते कई बार बिना अनुमति और गुणवत्ता जांच के दवाएं बाजार में उतार दी जाती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सिस्टम की नाकामी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराध है, जिसमें लालच ने इंसानियत को कुचल दिया है। हर मौत के साथ यह सवाल और तेज़ होता जा रहा है — क्या अब भी कोई जवाबदेही तय होगी, या फिर हमेशा की तरह जांच और आश्वासन की कहानी सुनाई जाएगी?
सरकार ने इस मामले में जांच समिति गठित करने की बात कही है, लेकिन जनता अब सिर्फ रिपोर्ट नहीं, कार्रवाई चाहती है। दोषी दवा कंपनियों पर कठोर कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की मांग उठ रही है।
इन मासूमों की मौत ने एक बार फिर याद दिलाया है कि जब तक स्वास्थ्य तंत्र में लालच और लापरवाही का ज़हर खत्म नहीं होगा, तब तक ऐसी त्रासदियाँ दोहराई जाती रहेंगी। सवाल अब भी वही है — क्या कभी रुकेगा यह मानवता का सौदा?
