
किसानों और छात्रों ने जाना श्री अन्न का महत्व, स्वास्थ्य लाभ और भविष्य की संभावनाएं
कुशीनगर, 17 अक्टूबर 2025।
कुशीनगर जिले में शुक्रवार को जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर, रविन्द्रनगर में श्री अन्न (मिलेट्स) रेसिपी विकास एवं उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम तथा जनपद स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों को पारंपरिक भारतीय अनाज “श्री अन्न” (मिलेट्स) के उपयोग, उसके स्वास्थ्य लाभ, पोषण मूल्य और आर्थिक महत्व से अवगत कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मा० राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) राजेश्वर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार श्री अन्न को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सशक्त नींव है।”
उन्होंने कहा कि बाजरा, रागी, सांवा, कोदो, कुटकी और रामदाना जैसे मिलेट्स हमारे पूर्वजों के आहार का हिस्सा रहे हैं, जो न केवल पोषण से भरपूर हैं बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी उपयोगी हैं। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मिलेट्स जैसी फसलें कम पानी, कम लागत और उच्च पोषण मूल्य के कारण खेती की दिशा बदल सकती हैं।
श्री अन्न से बने व्यंजनों की प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों और विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा मिलेट्स से बने स्वादिष्ट व्यंजन जैसे बाजरे की खिचड़ी, रागी लड्डू, सांवा उपमा, रामदाना हलवा, और मिलेट्स टिक्की आदि तैयार कर प्रदर्शित किए गए। उपस्थित जनसमूह ने इन पारंपरिक लेकिन पोषक व्यंजनों का आनंद लिया।
छात्राओं ने दिखाई कला, हुई सम्मानित
कार्यक्रम में राजकीय संविलय विद्यालय रविन्द्रनगर की लगभग 70 छात्राओं सहित कई विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मिलेट्स थीम पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपने चित्रों के माध्यम से श्री अन्न के महत्व को प्रदर्शित किया। विजेताओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के साथ मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं सात्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।
किसानों को मिला मिनीकिट बीज, बढ़ेगी रबी उत्पादकता
मुख्य अतिथि ने कृषकों को राई एवं सरसों के मिनीकिट बीज वितरित किए। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने हेतु अनेक योजनाएँ चला रही है, जिनमें बीज, उर्वरक एवं कृषि यंत्रों पर अनुदान की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर श्री अन्न फसलों की ओर रुख करें ताकि स्वस्थ समाज और सशक्त कृषि दोनों को बढ़ावा मिले।
विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक अतीन्द्र सिंह ने मिलेट्स से होने वाले स्वास्थ्य लाभों और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मिलेट्स शरीर के लिए फाइबर, आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन के उत्कृष्ट स्रोत हैं, जो मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के वैज्ञानिक डा. अरुण कुमार सिंह और बाबू गेंदा सिंह अनुसंधान केंद्र सेवरही के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक विनय कुमार मिश्रा ने किसानों को श्री अन्न की खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर ये फसलें न केवल स्वास्थ्यवर्धक हैं, बल्कि कम लागत और उच्च उत्पादन क्षमता के कारण आर्थिक रूप से भी लाभकारी हैं।
डा. मेनका, जिला कृषि अधिकारी कुशीनगर ने जनपद में बीज, उर्वरक, कीटनाशक और तकनीकी सहायता की उपलब्धता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “कृषि विभाग किसानों के हर कदम पर सहयोग के लिए तत्पर है। हमारा उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान दोनों से जोड़ना है।”
सफल संचालन और सहभागिता
कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री जमालुद्दीन अंसारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य पशुचिकित्साधिकारी रविन्द्र कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी सुदीप वर्मा, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक लक्की तिवारी (ग्रुप ए) तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डा. मेनका ने सभी अतिथियों, कृषकों, छात्रों और स्वयं सहायता समूहों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन किसानों के ज्ञान, उत्साह और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
श्री अन्न — स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि “श्री अन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और सतत विकास का आधार है।”
कुशीनगर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक सरकारी पहल रहा, बल्कि लोगों के मन में पारंपरिक अनाजों के प्रति नई चेतना जगाने वाला जन-आंदोलन भी साबित हुआ।
“श्री अन्न अपनाएं, स्वस्थ भारत बनाएं” — यही रहा आयोजन का मूल संदेश।




