
कुशीनगर।
जनपद कुशीनगर के दुदही विकासखंड अंतर्गत आने वाली कई ग्राम सभाओं में सचिवालय भवनों पर ताले लटकने और पंचायत सहायकों के गायब रहने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। शासन की मंशा के विपरीत पंचायत स्तर पर कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
जानकारी के अनुसार, दुदही ब्लॉक के कई सचिवालय भवन सुबह से शाम तक बंद रहते हैं। ग्रामीण जब किसी सरकारी योजना की जानकारी या प्रमाणपत्र, आवास, शौचालय, राशन कार्ड जैसी जरूरी जानकारी के लिए भवन पहुंचते हैं तो उन्हें ताला बंद मिलता है। पंचायत सहायकों की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक मुख्यालय या तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत भवनों में रोजाना कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य है, लेकिन महीनों से वहां कोई नहीं बैठता। कई जगह तो भवनों में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और रजिस्टरों पर धूल जमी है। कुछ पंचायतों में यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मनरेगा और पंचायत से जुड़ी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तक लंबित पड़ी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न तो निरीक्षण किया जा रहा है और न ही अनुपस्थित सहायकों पर कोई कार्रवाई। “अगर यही हाल रहा तो गांवों में विकास योजनाएँ केवल कागजों पर ही सीमित रह जाएंगी,” एक ग्रामीण ने कहा।
वहीं, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक स्तर से ऐसे मामलों की रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि जो पंचायत सहायक बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग है कि सचिवालय भवनों को नियमित रूप से खोला जाए, कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य की जाए और जनता से सीधे जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।
जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या प्रशासन इस लापरवाही पर अंकुश लगाने में सफल हो पाएगा या फिर पंचायतों के ताले यूँ ही बंद रहेंगे।
