
तमकुहीराज/कुशीनगर। “बिजली की समस्या बताएंगे तो गाड़ी भी हमीं का लगाएंगे?” —
यह सवाल इन दिनों तमकुहीराज देहात के सरया बुज़ुर्ग गांव के ग्रामीणों की जुबान पर है। गांव में एक सप्ताह से ट्रांसफार्मर जला पड़ा है, लेकिन मरम्मत या बदलने के बजाय कथित रूप से विभागीय जेई ने ग्रामीणों से ही “ट्रांसफार्मर लाने-ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था” करने को कह दिया। इतना ही नहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि जेई ने साफ कह दिया — “पूरा जिला ट्रांसफार्मर संकट में है, गाड़ी भेजिए तभी काम हो पाएगा।”
बिजली ठप होने से गांव लगातार अंधेरे में डूबा है। दीपावली जैसे रोशनी के पर्व पर भी छाया हुआ यह अंधेरा अब ग्रामीणों के आक्रोश में बदलता दिख रहा है। घरों में चूल्हा-चौका और रोशनी की दिक्कत, किसानों की सिंचाई रुकी, बाजार और छोटी दुकानों की आमदनी आधी हो गई है। महिलाएं त्योहार की तैयारियां नहीं कर पा रहीं, बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं और मोबाइल तक चार्ज न होने से लोग सूचना–संपर्क से कट गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा उपहास है। वे सवाल उठा रहे हैं—
“बिल समय पर न जमा करें तो नोटिस और कनेक्शन काटने की तैयारी हो जाती है, लेकिन जब सेवा देने की बारी आती है तो बहाना क्यों?”
गांव वालों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया, तो वे बिजली विभाग कार्यालय घेराव और धरना देने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विभाग की जिम्मेदारी जनता पर नहीं थोपी जा सकती।
इस पूरे प्रकरण ने बिजली व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या अब बिजली पाने के लिए ग्रामीणों को ट्रांसफार्मर, वाहन और इंतज़ाम भी खुद ही करना होगा?
और सबसे अहम— क्या सरया बुज़ुर्ग गांव सच में दीपावली अंधेरे में मनाएगा?
ग्रामीण अब समाधान की प्रतीक्षा में हैं, और प्रशासन की चुप्पी उनकी नाराजगी और चिंता, दोनों बढ़ा रही है।
