
कुशीनगर। छोटी दीपावली की संध्या पर पडरौना नगर का माहौल भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर हो उठा। मानस कॉलोनी स्थित श्री बुढ़िया माता मंदिर परिसर के नवनिर्मित छठ घाट पर 31 हज़ार दीयों की अलौकिक रोशनी ने ऐसा नज़ारा पेश किया कि मानो धरती पर साक्षात दीपों का समुद्र उतर आया हो। पिछले छह वर्षों से लगातार मनाया जा रहा यह दीपोत्सव क्षेत्र में लोक आस्था के साथ-साथ परंपरा के पुनर्जीवन का अभूतपूर्व उदाहरण बन चुका है।
विशेष बात यह रही कि इस बार भी दीप कार्यक्रम में उपयोग किए गए सभी दीप स्थानीय कुम्हारों द्वारा हाथों से तैयार किए गए, जिससे न केवल पारंपरिक कला को बढ़ावा मिला, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशी भावना का संदेश भी जन-जन तक पहुँचा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस परंपरा का उद्देश्य छठ महापर्व से जुड़े लोक सरोकारों, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय कारीगरों को आर्थिक संबल देना है।
शाम ढलते ही जैसे ही घाट पर दीप सजाए गए, पूरा पिरसर सुनहरी आभा में नहाने लगा। घाट की सीढ़ियों से लेकर मंदिर प्रांगण तक दीपों की कतारें अद्भुत श्रृंगार की तरह चमकने लगीं। महिलाएँ पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत गाती रहीं, बच्चे उत्साह से दीप सजाने में जुटे रहे और श्रद्धालु ‘छठ मैया’ के जयकारों से वातावरण को आध्यात्मिकता से भरते रहे।
आयोजकों ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस दीपोत्सव को और भव्य रूप देने की योजना है, ताकि पडरौना का छठ घाट पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाए। दीपों की जगमगाहट के साथ रौशन इस अनूठे आयोजन ने छोटी दीपावली को आस्था, ऊर्जा और एकजुटता की उजली परंपरा से जोड़ दिया।
