


सबहेड: RTO–GST अधिकारी मिलकर चला रहे हैं अबैध बसों का जाल, स्थानीय प्रशासन का खामोश रहना बढ़ा रहा जान का खतरा
कुशीनगर। बहादुरपुर चौकी क्षेत्र में हुई बस पलटने की घटना को मात्र दुर्घटना बताकर टालना अब संभव नहीं रहा। 55 सीट वाली बस में 200 से अधिक यात्री सवार थे, छत पर भारी लगेज रखा गया था और सड़क पर नियमों की धज्जियां उड़ रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल सिस्टम की लापरवाही नहीं, बल्कि एंट्री–मिलीभगत और वसूली का संपूर्ण जाल है।
बस पलटते ही एक तरफ हादसा देख, दूसरी तरफ प्रशासन का सन्नाटा। लेकिन स्थानीय सूत्रों और यात्रियों ने खुलासा किया कि RTO और GST एंट्री अधिकारी मिलकर इस तरह की बसों का संचालन कर रहे हैं, जो न केवल नियमों के खिलाफ हैं बल्कि यात्रियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।
बहादुरपुर चौकी बस हादसा: भीड़, जोखिम और लापरवाही
हादसे के समय बस में 55 सीटें थीं, लेकिन 200 से ज्यादा यात्री सवार थे। छत पर भारी सामान रखा गया था, जिससे बस का संतुलन बिगड़ा। यात्रियों और ग्रामीणों का कहना है कि चालक ने सड़क पर कई खतरनाक मोड़ और उबड़-खाबड़ हिस्सों से बस को तेजी से चलाया।
एक ग्रामीण ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, “बस तो चलती मेट्रो जैसी थी। सीटें कम और लोग ज्यादा। अधिकारी जानते हुए भी इसे रोक नहीं रहे।”
स्थानीय पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि बस का रूट—हेतिमपुर टोल से माड़ापार हाइवे—नियमित जांच से बचा हुआ था। 24 लंबित चालान होने के बावजूद बसें सड़क पर चल रही हैं।
RTO–GST एंट्री नेक्सस: अबैध बसों का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि RTO और GST एंट्री अधिकारी बस मालिकों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं। अधिकारी नकली दस्तावेज़ों के आधार पर बसों का संचालन अनुमति दे रहे हैं। इस प्रक्रिया में बसों की सीट क्षमता, सुरक्षा उपकरण और यात्री संख्या की कोई जांच नहीं होती।
एक स्थानीय सूत्र ने बताया, “कई बसें 16, 18 या 28 सीट वाली होने के बावजूद 60–80 यात्री के लिए ऑपरेट की जा रही हैं। अधिकारी बस मालिकों से मोटा कमीशन लेते हैं और इसे कवर करते हैं।”
यह खुलासा सड़क सुरक्षा नियमों की अवहेलना को स्पष्ट करता है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 123 और 129 के तहत, अधिक सवारियों को बैठाना, अनियमित बस संचालन और चालक की जिम्मेदारी कानूनन दंडनीय है।
24 लंबित चालान: सड़क पर दिखावे की जांच
स्थानीय प्रशासन ने 24 लंबित चालानों का जिक्र किया था। इन चालानों की जांच में सामने आया कि अधिकतर चालान केवल कागजों में दर्ज थे। वास्तविक सड़क पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक यात्री ने बताया, “हमने कई बार पुलिस को इस बारे में बताया, लेकिन उनका रवैया सिर्फ दिखावा था। बसें अब भी उसी रास्ते पर चलती हैं।”
विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रणालीगत भ्रष्टाचार का हिस्सा है। RTO और GST अधिकारियों की मिलीभगत ने सड़क सुरक्षा को पूरी तरह अनदेखा कर दिया है।
हेतिमपुर टोल और माड़ापार हाइवे नेटवर्क का खुलासा
हमारी जांच में सामने आया कि हेतिमपुर टोल और माड़ापार हाइवे पर बस मालिकों का स्थायी नेटवर्क है। टोल कर्मचारियों की मिलीभगत और RTO के दस्तावेजी छद्माचार से बस मालिक बिना किसी रोक-टोक के बसों का संचालन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस हाइवे पर कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन किसी भी मामले में अधिकारी जिम्मेदारी लेने के बजाय चुप्पी साध लेते हैं।
यात्रियों और ग्रामीणों के बयान
एक यात्री ने कहा, “बस इतनी अधिक भीड़ में थी कि छत पर खड़े लोगों की कोई सुरक्षा नहीं थी। कोई भी छोटा झटका जानलेवा साबित हो सकता था।”
ग्रामीणों ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक झटका है, असली खतरा तो सिस्टम की मिलीभगत और भ्रष्टाचार में छिपा है।
स्थानीय सूत्रों का खुलासा है कि बस मालिकों को RTO और GST अधिकारियों से नियमित सूचना और सुरक्षा छूट मिलती है, जिससे वे बड़े पैमाने पर नियम तोड़ते हैं।
कानूनी विश्लेषण: मोटर व्हीकल एक्ट + जिम्मेदारी
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत, बस मालिक और चालक दोनों जिम्मेदार हैं। धारा 123 कहती है कि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को नहीं बिठाया जा सकता। धारा 129 के तहत, चालक को सड़क पर यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है।
लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इन कानूनों की अवहेलना की है। 24 लंबित चालान और ट्रैफिक निरीक्षकों की अनदेखी ने सिस्टम की विफलता को उजागर किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बस मालिक, RTO और GST अधिकारियों के मिलकर चल रहे इस जाल पर STF या SIT स्तर की जांच होनी चाहिए।
प्रशासन और सरकार पर दबाव
स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने STF और SIT जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाया, तो भविष्य में और बड़े हादसे होंगे।
एक यात्री ने चेतावनी दी, “बस पलटी तो एक हादसा था, लेकिन वास्तविक खेल तो सिस्टम की मिलीभगत का है। अगर जांच नहीं हुई, तो ये बसें और यात्रियों की जान के लिए घातक साबित होंगी।”
अगले अंक का टीज़र: चलती मेट्रो कैसे बनती है
हमारी अगली रिपोर्ट में हम दिखाएंगे कि कैसे 16, 18 और 28 सीट वाली बसें चलती मेट्रो में तब्दील हो जाती हैं। इस प्रक्रिया में RTO, GST और बस मालिकों की मिलीभगत का पूरा खेल सामने आएगा।
ब्रैंडिंग:
— विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर: सच्चाई की आवाज़, आपके पास सीधे रिपोर्ट।
कुशीनगर बस हादसा: बस पलटी केवल बहाना, असली खेल एंट्री और मिलीभगत का! वायरल वीडियो उजागर कर रहा सिस्टम की चुप्पी और जिम्मेदारों की मिलीभगत, सवालों के घेरे में प्रशासन।
