
कुशीनगर। तहसील तमकुहीराज के ग्राम सभा कुबेरा भुसावल पट्टी में राजस्व अभिलेखों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी व शिकायतकर्ता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि ग्राम समाज की भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में “नवीन परती” के रूप में दर्ज है, उसमें मनमाने ढंग से पट्टा धारकों के नाम चढ़ाकर अभिलेखों में हेरफेर की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पट्टा किसे, कब और किन नियमों के तहत दिया गया, इसकी जानकारी आज तक पारदर्शी रूप में उपलब्ध नहीं कराई गई।
धर्मेन्द्र पाण्डेय के अनुसार उन्होंने लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम, डीएम तक प्रार्थना पत्र दिए, परंतु हल्का लेखपाल द्वारा “पट्टा धारकों के कब्जे” का हवाला देकर अधिकारियों को गुमराह किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में RTI के तहत मांगी गई सूचना भी अधूरी और भ्रामक दी गई, जो RTI एक्ट 2005 की धारा 6(1) व 7(1) का उल्लंघन है।
उन्होंने UP राजस्व संहिता 2006 की धारा 33, 35, 67 व 122-B का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्राम समाज की भूमि पर गलत प्रविष्टि होने पर अभिलेख संशोधन व जांच अनिवार्य है, पर तहसील स्तर पर फाइल दबाई जा रही है। शिकायतकर्ता ने IGRS, जनशिकायत पोर्टल और रजिस्ट्री डाक के माध्यम से भी पूरा मामला उठाया, परंतु अब तक न तो जांच समिति गठित हुई और न ही स्थलीय सत्यापन किया गया।
धर्मेन्द्र पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तो वे उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे। फिलहाल प्रशासन की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्यों की राजस्व विभाग ने अपने ही सरकारी जमीनों को भूमि माफियाओं के हवाले किया जा रहा है।





