
विलेज फास्ट टाइम्स | तमकुहीराज, कुशीनगर
कुशीनगर। राजनीति के मैदान में अब नई ऊर्जा के साथ युवा वर्ग तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ग्राम पंचायत चुनावों को जहां पहले सामाजिक सेवा या जिम्मेदारी का दायित्व माना जाता था, वहीं अब युवा इसे बेहतर करियर और प्रभावशाली पहचान का मंच मानने लगे हैं। कुशीनगर के तमकुहीराज सहित आसपास के इलाकों में इस बार पंचायत चुनाव को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
गांवों की मिनी संसद कहे जाने वाले इन चुनावों में युवाओं की सक्रियता ने माहौल बदल दिया है। कई ऐसे युवा जो पहले महानगरों या परदेश में नौकरी और कारोबार में व्यस्त थे, अब अपने गांव लौटकर प्रधान, बीडीसी या जिला पंचायत सदस्य के रूप में अपनी किस्मत आजमाने उतरे हैं। ये युवा राजनीति को सेवा का माध्यम मानते हुए समाज में बदलाव लाने का संकल्प ले रहे हैं।
युवाओं का कहना है कि पंचायतें अब सिर्फ गांव की बुनियादी जरूरतों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि बढ़ते बजट, योजनाओं और नीतिगत फैसलों के कारण इनका प्रभाव काफी व्यापक हो गया है। यही वजह है कि शिक्षित और ऊर्जावान युवाओं को इसमें करियर की संभावनाएं नज़र आ रही हैं।
स्थानीय युवा प्रत्याशी स्मृति कुशवाहा, हासन अली, संदीप शर्मा और युवा जावेद अंसारी ने बताया कि “सरकारी नौकरी या कारोबार के साथ-साथ समाज सेवा का मौका पंचायत चुनावों के माध्यम से मिल सकता है। हम अपने गांव की प्रगति और जनता के विकास के लिए मैदान में उतरे हैं।”
गांव-गांव में चुनावी सरगर्मी इस कदर है कि हर नुक्कड़ पर चर्चा का विषय “युवा नेतृत्व” बन गया है। कई युवाओं ने यह भी कहा कि अगर जनता ने भरोसा जताया, तो वे विकास के हर मोर्चे पर गांव को नई दिशा देंगे — चाहे बात शिक्षा की हो, स्वच्छता की या रोजगार सृजन की।
युवा अब राजनीति को बदलाव का माध्यम मानते हुए आगे आ रहे हैं। दिन-रात गांवों में जाकर जनसंपर्क, संवाद और रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि गांव की तस्वीर और तकदीर बदलना है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि पंचायत चुनाव 2025 में युवाओं की नई सोच और नेतृत्व की लहर साफ दिखाई दे रही है, जो आने वाले समय में ग्रामीण राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय कर सकती है।
(संवाददाता – धमेन्द्र पाण्डेय, विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर)
