
पडरौना (कुशीनगर)। नगर के हृदयस्थल स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री बुढ़िया माता मंदिर प्रांगण में मंगलवार, 29 अक्टूबर 2025 की शाम भव्य और दिव्य गंगा आरती समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन कुशीनगर महोत्सव के तहत संपन्न हुआ, जिसने पूरे नगर में भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का अनुपम वातावरण निर्मित किया।
मंदिर प्रांगण को दीपों, फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था। जब सूर्यास्त के पश्चात वाराणसी से पधारे प्रसिद्ध पुरोहितों द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से गंगा आरती आरंभ हुई, तो पूरा वातावरण मंत्रोच्चारण, शंखनाद और घंटियों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। आरती की लौ जब लहराई, तो श्रद्धालुओं के चेहरे पर भक्ति और आनंद की झिलमिलाहट स्पष्ट झलकने लगी।
इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य रतन पाल सिंह एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री अतुल सिंह उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने मां गंगा और बुढ़िया माता की आरती में सम्मिलित होकर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। उन्होंने मंदिर समिति और आयोजन टीम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने और लोगों में सकारात्मकता फैलाने का माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम का संचालन कुशलता पूर्वक करते हुए संयोजक एवं एपीएन न्यूज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय राय ने बताया कि बुढ़िया माता मंदिर नगरवासियों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा — “यहां होने वाले धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ते हैं। गंगा आरती जैसी संध्याएं न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती हैं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान को भी जीवित रखती हैं।”
भव्य गंगा आरती कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत नगर पालिका परिषद पडरौना के अध्यक्ष श्री विनय जायसवाल ने दीप प्रज्वलन कर की। उन्होंने मंच से मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों का पारंपरिक रीति से अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। अपने स्वागत संबोधन में श्री जायसवाल ने कहा —
“श्री बुढ़िया माता मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है। यहां होने वाले ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में एकता, सद्भाव और भक्ति की भावना सुदृढ़ होती है। नई पीढ़ी को भी हमारी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।”
उन्होंने आगे कहा कि नगर पालिका परिषद का लक्ष्य है कि पडरौना नगर में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को और अधिक प्रोत्साहन मिले। उन्होंने नगर की स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष टीमों को निर्देशित किया था, जिससे पूरा कार्यक्रम व्यवस्थित, शांतिपूर्ण और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
गंगा आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर दीपमालाओं से जगमगा उठा। जैसे ही वाराणसी से आए आचार्यों ने गंगा स्तोत्र और आरती मंत्रों का उच्चारण प्रारंभ किया, सैकड़ों दीपों की रौशनी से मंदिर परिसर आलोकित हो उठा। “हर हर गंगे” और “जय मां बुढ़िया माता” के जयघोषों से वातावरण भक्ति और ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालु महिलाओं ने दीप प्रज्वलित कर आरती में भाग लिया, जबकि युवाओं ने भजन-कीर्तन में तालियां बजाकर भक्तिमय लहर में अपना योगदान दिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान नगर और आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। लोगों ने इसे नगर के इतिहास का एक आध्यात्मिक उत्सव बताया। मंदिर परिसर में कहीं महिलाएं भक्ति गीत गा रही थीं, तो कहीं बच्चे दीप सजाने में लगे थे। पूरा माहौल जैसे दिव्य लोक का दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
कार्यक्रम के समापन पर नगरपालिका अध्यक्ष श्री विनय जायसवाल ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा —
“हम सभी को मिलकर अपने नगर को न केवल स्वच्छ और सुंदर बनाना है, बल्कि अपनी परंपराओं को भी सजीव बनाए रखना है। मां गंगा और बुढ़िया माता की कृपा से नगर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।”
अंत में प्रसाद वितरण किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने “गंगा माता की जय” और “बुढ़िया माता की जय” के जयघोषों से वातावरण को पुनः गूंजा दिया। आरती की लौ बुझने के बाद भी लोगों के चेहरे पर भक्ति की चमक देर रात तक बनी रही।
इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। लोगों का कहना था कि इस तरह के सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन नगर की पहचान और गौरव को नई ऊंचाई देते हैं।
कुल मिलाकर, श्री बुढ़िया माता मंदिर में संपन्न गंगा आरती समारोह ने नगर पडरौना की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। यह आयोजन न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि नगरवासियों के लिए सामूहिक आस्था और एकता का जीवंत उदाहरण भी साबित हुआ।
