
📰 विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
कुशीनगर, 31 अक्टूबर।
जनपद कुशीनगर के तहसील तमकुहीराज क्षेत्र के ग्राम सभा कुबेरा भुआलपट्टी में जमीन से जुड़ा एक बड़ा विवाद सुर्खियों में है। गांव निवासी धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने ग्राम समाज की भूमि पर फर्जी पट्टा आवंटन और राजस्व अभिलेखों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह घोटाला न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाता है, बल्कि सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को भी चुनौती देता है।
धर्मेन्द्र पाण्डेय के अनुसार, ग्राम समाज की भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में “नवीन परती” के रूप में दर्ज है, उसे व्यक्तिगत कब्जे के रूप में दिखाकर कुछ लोगों के नाम पट्टा प्रविष्टि की गई है। उन्होंने बताया कि न तो इसकी कोई आधिकारिक सूची सार्वजनिक की गई, और न ही पट्टा आदेश की प्रतिलिपि आज तक उन्हें दिखाई गई।
“किसको, कब और किस नियम के तहत पट्टा दिया गया, इसका कोई प्रमाण अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया। लेखपाल लगातार यह कहकर मामले को दबा रहा है कि ‘पट्टा धारकों के कब्जे में भूमि है’, जबकि अभिलेखों में उसकी पुष्टि नहीं होती,”
— शिकायतकर्ता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा।
RTI से मिली अधूरी जानकारी, नियमों का उल्लंघन का आरोप
धर्मेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने 3 फरवरी 2025 को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवश्यक अभिलेख मांगे थे, जिसमें पट्टा आदेश, नामांतरण आदेश, खतौनी प्रविष्टि और ग्राम सभा की स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज शामिल थे।
लेकिन, जो जानकारी उन्हें दी गई वह अधूरी, भ्रामक और अपूर्ण थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह RTI अधिनियम 2005 की धारा 6(1) और 7(1) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके अनुसार मांगी गई जानकारी 30 दिनों के भीतर पूर्ण रूप से देना अनिवार्य होता है। उन्होंने कहा कि यदि सूचना अधूरी है, तो अब वे प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के समक्ष अपील दायर करेंगे।
राजस्व संहिता की धाराएं और प्रशासनिक जिम्मेदारी
कानूनी दृष्टि से देखें तो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की कई धाराएं इस मामले पर सीधे लागू होती हैं —
धारा 67, 68, 122-B: ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जे या गलत प्रविष्टि की स्थिति में कार्यवाही अनिवार्य।
धारा 33: अभिलेख संशोधन का अधिकार।
धारा 35: दर्ज नाम के सत्यापन का दायित्व।
धारा 219: राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही और कर्तव्य की परिभाषा।
इन प्रावधानों के बावजूद, शिकायतकर्ता का कहना है कि फाइलें तहसील स्तर पर दबाई जा रही हैं, जिससे न तो जांच आगे बढ़ पा रही है और न सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई है।
सोशल मीडिया पर उठाई आवाज, फिर भी प्रशासन मौन
धर्मेन्द्र पाण्डेय ने इस मामले को लेकर ट्विटर (X) पर भी आवाज उठाई है।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा —
“कुशीनगर में जमीन विवाद का बड़ा मामला: तमकुहीराज के कुबेरा भुआलपट्टी में पट्टा घोटाले के आरोप — लेकिन प्रशासन मौन है।”
उन्होंने अपने ट्वीट में @dm_kushinagar, @MSTawarIAS, @PMOIndia, @CMOfficeUP, @upgovt, @BoardofRevenue, @anandibenpatel, @ChiefSecyUP, @BJP4UP सहित कई प्रमुख सरकारी और राजनीतिक हैंडल्स को टैग किया।
लेकिन उनका कहना है कि “अब तक न कोई जवाब आया, न ही कोई कार्रवाई दिखी।”
धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय का कहना है कि यदि प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाता, तो इससे ग्राम समाज की भूमि की पारदर्शिता और सरकारी राजस्व संरक्षण नीति दोनों पर प्रश्नचिह्न लगेंगे।
शिकायतकर्ता की मांग — निष्पक्ष जांच और अभिलेखों का सार्वजनिक सत्यापन
धर्मेन्द्र पाण्डेय ने कहा —
“मेरी मांग सीधी है — यदि पट्टे वैध हैं तो पारदर्शी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, और यदि गड़बड़ी है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। राजस्व अभिलेखों की सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द निष्पक्ष जांच नहीं कराई, तो वे जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे और सभी संबंधित राजस्व अधिकारियों व विभागों को विपक्षी के रूप में न्यायालय में पक्षकार बनाएंगे।
जांच की प्रमुख बिंदु:
पट्टा आवंटन प्रक्रिया की जांच – यह स्पष्ट किया जाए कि पट्टा किन नियमों के तहत दिया गया?
अभिलेखों का सार्वजनिक सत्यापन – खतौनी, खसरा, पट्टा आदेश, और नामांतरण पत्र सार्वजनिक किए जाएं।
लेखपाल व राजस्वकर्मियों की भूमिका की जांच – क्या जानबूझकर गलत जानकारी दी गई?
उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन – एसडीएम या डीएम स्तर पर कमेटी बनाकर स्थलीय जांच कराई जाए।
RTI उल्लंघन पर जवाबदेही तय की जाए – सूचना अधूरी देने वाले अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई।
प्रशासन की चुप्पी पर बढ़ रहे सवाल
अब तक तमकुहीराज तहसील प्रशासन ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रकरण का संज्ञान डीएम कार्यालय तक पहुँच चुका है, परंतु जांच प्रक्रिया अभी लंबित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि ग्राम समाज की भूमि संरक्षण व्यवस्था पर एक गहरा सवाल है।
यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की गई, तो भूमाफिया और विभागीय मिलीभगत का खुलासा संभव है।
“यह सिर्फ कागजों का खेल नहीं, यह गरीबों के हक और सरकारी ईमानदारी का सवाल है।”
— स्थानीय ग्रामीणों का कहना।
निष्कर्ष: न्याय या निष्क्रियता?
कुबेरा भुआलपट्टी का यह मामला कुशीनगर के राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
जहाँ एक ओर सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिकायतों पर कार्रवाई न होना जनता के भरोसे को कमजोर करता है।
अब देखना यह है कि जिलाधिकारी कुशीनगर महेंद्र सिंह तंवर इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं —
क्या जल्द ही उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर सच्चाई सामने लाएंगे,
या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में धूल फांकता रहेगा?
🖋️ रिपोर्टर: विशेष संवाददाता, विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
📅 दिनांक: 31 अक्टूबर 2025
📍 स्थान: तमकुहीराज, कुशीनगर (उ.प्र.)





