
दबंगों से परेशान विकलांग महिला ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, डीएम ने गंभीरता दिखाते हुए दिलाने का भरोसा दिया न्याय — गांव में मचा हड़कंप!
डीएम ने जताई संवेदना, पर सवाल — जब पीड़िता विकलांग है, तो अब तक दबंग बेखौफ क्यों घूम रहे हैं?

विलेज फास्ट टाइम्स, जनपद कुशीनगर
रिपोर्ट — ब्यूरो कुशीनगर
कुशीनगर जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र के सिंगहा गांव में दबंगई और प्रशासनिक उदासीनता का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। दो पैरों से विकलांग महिला अल्पना तिवारी ने गांव के दबंगों की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कुशीनगर को सौंपकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।
पीड़िता की हालत देखकर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने गहरी संवेदना जताई और न्याय दिलाने का भरोसा दिया, परंतु बड़ा सवाल यह है कि जब पीड़िता दो पैरों से विकलांग है, तो उसे न्याय के लिए राष्ट्रपति तक गुहार क्यों लगानी पड़ी? आखिर शासन-प्रशासन का तंत्र कब जागेगा?
🔴 प्रधानमंत्री आवास का सपना बना दुख का कारण!
पीड़िता अल्पना तिवारी, जो पूरी तरह से दोनों पैरों से विकलांग हैं, ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। प्रथम किस्त की धनराशि भी अवमुक्त कर दी गई। वह अपने पैतृक भूमि पर आवास निर्माण करा रही थीं, तभी गांव के कुछ दबंगों ने उनका यह सपना तोड़ दिया।
27 सितंबर 2025 की शाम करीब छह बजे, गांव के ही अज्जू, धीरज (पुत्र अरुण), मारकंडेय, सत्यम (पुत्र मनोज) तथा अरुण और मनोज (पुत्र मुरलीधर) अपने साथियों के साथ घर पर धावा बोल दिए। आरोप है कि दबंगों ने उसके बड़े भाई हेमंत मणि त्रिपाठी को बेरहमी से पीटा और जब विकलांग अल्पना बचाने पहुंचीं, तो उन्हें बाल पकड़कर जमीन पर घसीटा गया। मजदूरों और मिस्त्रियों को गालियाँ देकर भगा दिया गया, जिससे मकान निर्माण ठप पड़ गया। जाते-जाते दबंगों ने निर्माण सामग्री में तोड़फोड़ की और सामान उठा ले गए।

⚖️ थाने में गुहार — लेकिन नहीं दर्ज हुआ मुकदमा!
घटना के अगले ही दिन पीड़िता के भाई हेमंत मणि त्रिपाठी ने थानाध्यक्ष रामकोला राजप्रकाश सिंह को तहरीर दी और पूरी घटना का वीडियो क्लिप भी दिखाया। लेकिन पीड़िता के अनुसार, पुलिस ने न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही किसी आरोपी पर कार्रवाई की।
प्रश्न यह है — जब वीडियो साक्ष्य मौजूद है, तब पुलिस ने आंखें क्यों मूँद लीं? क्या दबंगों का आतंक कानून से बड़ा हो गया है?
🚨 एसपी के निर्देश भी ठंडे पड़े — कब जागेगा तंत्र?
निराश होकर पीड़िता के भाई ने पुलिस अधीक्षक कुशीनगर श्री केशव कुमार से भेंट की। एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज करने और दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। लेकिन आश्चर्य की बात है कि थानाध्यक्ष ने एसपी के आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया।
पीड़िता ने बताया कि थानाध्यक्ष ने खुले शब्दों में कहा — “मुकदमा नहीं लिखूंगा, जाओ न्यायालय से कराओ।”
क्या यह लोकतंत्र में पुलिस की भाषा है? क्या विकलांग, गरीब और असहाय अब न्यायालयों के चक्कर लगाकर ही इंसाफ पाएंगे?
💔 “अब जीने का कोई कारण नहीं बचा” — पीड़िता की व्यथा!
अल्पना तिवारी का कहना है कि वह पूरी तरह से विकलांग हैं, किसी प्रकार की भाग-दौड़ करने में सक्षम नहीं हैं, रहने को सिर पर छत नहीं है और दबंग लगातार धमकियाँ दे रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा है कि “ऐसी स्थिति में अब जीने का कोई कारण नहीं बचा, कृपया इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।”
उनकी यह गुहार न केवल प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाती है, बल्कि सरकार के उस “न्याय सबके लिए” के वादे को भी कटघरे में खड़ा करती है, जो धरातल पर लाचार और विकलांग नागरिकों तक नहीं पहुँच पा रहा।
🧭 डीएम ने कहा — न्याय दिलाया जाएगा!
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि पीड़िता को हर संभव न्याय दिलाया जाएगा।
लेकिन सवाल वही — कब तक विकलांगों को अपनी आवाज सुनाने के लिए राष्ट्रपति तक पहुँचना पड़ेगा?
क्या यह संवेदनहीन तंत्र की नाकामी नहीं है कि एक महिला अपनी ज़िंदगी समाप्त करने की अनुमति माँगने पर मजबूर हो जाए?
📢 विलेज फास्ट टाइम्स का सवाल:
क्या दबंगों की पकड़ इतनी मजबूत है कि एसपी के आदेश भी असरहीन हो गए?
विकलांग महिला को प्रधानमंत्री आवास न बनाने देना क्या मानवता का अपमान नहीं?
जब “मिशन शक्ति” और “मुख्यमंत्री हेल्पलाइन” जैसी योजनाएं हैं, तब एक महिला को इच्छामृत्यु तक क्यों सोचना पड़ा?
🕯️ यह घटना सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, यह उस तंत्र का आईना है जो सत्ता के गलियारों में संवेदना खो चुका है।
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर का सवाल — आखिर इस तंत्र को झकझोरने के लिए और कितनी अल्पनाएँ राष्ट्रपति को पत्र लिखेंगी?
