
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर।
जनपद कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के ग्राम भुआलपट्टी में भूमि विवाद से जुड़ा मामला अब प्रशासनिक गलियारों में गूंज उठा है। आवेदक धर्मेन्द्र कुमार पांडेय पुत्र गोकुलानन्द पांडेय ने आरोप लगाया कि ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे को वैध ठहराने के लिए लेखपाल द्वारा फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई, जिससे कुछ प्रभावशाली लोगों को भूमि लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
शिकायत के बाद जिलाधिकारी कुशीनगर ने तत्काल जांच के आदेश दिए। उपजिलाधिकारी तमकुहीराज ने नायब तहसीलदार की देखरेख में राजस्व अभिलेख, खतौनी, नक्शा और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर गहन जांच कराई।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ — विवादित भूमि गाटा संख्या 32 (0.073 हे.) और 34 (0.012 हे.) राजस्व अभिलेखों में नवीन पट्टाधारकों के नाम दर्ज पाई गई। लेकिन मौके पर यह भूमि आवासीय क्षेत्र में स्थित थी और किसी भी सरकारी या सार्वजनिक प्रयोजन में नहीं आती। इससे साफ साबित हुआ कि लेखपाल द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक रिपोर्ट मनगढ़ंत थी, जिसने प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास किया।
ग्रामीणों की मौजूदगी में हुई इस जांच में यह भी सामने आया कि भूमि पर किसी प्रकार का सरकारी कब्जा नहीं है। बावजूद इसके, प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे “ग्राम समाज की भूमि” दिखाकर पात्रों की भूमि को अपात्र घोषित करने की साजिश रची गई।
क्या कहता है कानून?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 26 और 34 के तहत ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जा, अभिलेखों से छेड़छाड़ या भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत करना गंभीर अपराध माना गया है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी जानबूझकर झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनिक ही नहीं बल्कि दंडात्मक कार्रवाई भी अनिवार्य है।
उपजिलाधिकारी तमकुहीराज ने अपनी विस्तृत जांच आख्या जिलाधिकारी को भेज दी है, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि आवेदक की शिकायत सही और लेखपाल की रिपोर्ट फर्जी एवं भ्रामक थी।
प्रशासनिक चुप्पी बनी सवाल
आश्चर्यजनक रूप से, शिकायत के आधार पर कार्रवाई की मांग ट्विटर पर भी उठाई गई, परंतु अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। ज़ीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार में यह चुप्पी अब चिंता का विषय बन चुकी है।
धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय का कहना है कि अगर ऐसे मामलों पर उदाहरण स्वरूप कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो भूमि विवादों की पारदर्शिता खत्म हो जाएगी और जनता का भरोसा शासन-प्रशासन पर से उठ जाएगा।
उच्च न्यायालय तक जाएगी गुहार
सूत्रों के अनुसार, आवेदक अब इस पूरे मामले को उच्च न्यायालय में उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब शासन स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो न्यायालय से ही उम्मीद बाकी है।
भुआलपट्टी की यह जांच रिपोर्ट अब पूरे जनपद में चर्चा का विषय बनी हुई है — सवाल यह नहीं कि रिपोर्ट झूठी थी या नहीं, बल्कि यह है कि झूठ पकड़े जाने के बाद भी कार्रवाई कब होगी?
🚨 कुशीनगर से बड़ी खबर!
ट्विटर पर @dm_kushinagar, @UPGovt व @CMOfficeUP को टैग कर की गई शिकायत के बावजूद प्रशासन मौन! धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय की पुकार अनसुनी, समस्याओं पर नहीं हो रही कार्रवाई। आखिर कब जागेगा प्रशासन? #Kushinagar #UPGovt #Accountability





