
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दिनांक : 09 नवम्बर 2025
कुशीनगर : श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं से भरा रहा मुख्यमंत्री का दौरा, कहा—“भदंत ज्ञानेश्वर ने कुशीनगर को विश्व मानचित्र पर स्थापित किया”
कुशीनगर की पवित्र भूमि रविवार को उस समय भावविभोर हो उठी, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बौद्ध धर्मगुरु अग्गमहापंडित भदंत ज्ञानेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को कुशीनगर स्थित म्यांमार बौद्ध विहार पहुंचे और भदंत ज्ञानेश्वर के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर प्रार्थना की और कहा कि भदंत ज्ञानेश्वर का जीवन समाज, शिक्षा और धर्म के प्रति समर्पण का प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि भदंत ज्ञानेश्वर ने न केवल बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया। उन्होंने कहा, “भिक्षु ज्ञानेश्वर जी ने बौद्ध संस्कृति की जो लौ प्रज्ज्वलित की, वह सदा अमर रहेगी। कुशीनगर की यह पवित्र भूमि आज उनके योगदान को नमन कर रही है।”
इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, सांसद विजय कुमार दुबे, विधायक पडरौना, कुशीनगर, तमकुहीराज, फाजिलनगर, खड्डा, रामकोला सहित कमिश्नर, डीआईजी, डीएम, एसपी और बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु गण, श्रद्धालु एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भिक्षु ज्ञानेश्वर का जीवन—सेवा, शिक्षा और साधना का प्रतीक
31 अक्टूबर 2025 की सुबह 5:59 बजे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धर्मगुरु भदंत ज्ञानेश्वर का देहावसान हो गया। उनके निधन की खबर से न केवल कुशीनगर बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। वे कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एवं म्यांमार बौद्ध विहार के प्रमुख थे।
भदंत ज्ञानेश्वर का जीवन पूरी तरह बुद्ध की शिक्षाओं, करुणा और मानव सेवा को समर्पित रहा। वे डॉ. भीमराव आंबेडकर के गुरु भाई भी थे। उन्होंने न केवल धर्म के प्रचार-प्रसार का दायित्व निभाया बल्कि शिक्षा और सांस्कृतिक विकास को भी अपना लक्ष्य बनाया।
शिक्षा और विद्या के क्षेत्र में योगदान
भदंत ज्ञानेश्वर ने उत्तर प्रदेश बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक, परास्नातक और विधि स्नातक की उपाधि हासिल की। शिक्षा के महत्व को समझते हुए उन्होंने कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों में अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने में योगदान दिया।
उन्होंने अपने जीवन में यह दिखाया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित और सशक्त बनाना भी उसका अभिन्न अंग है। उनके प्रयासों से आज कुशीनगर शिक्षा और आध्यात्मिकता का संगम बन चुका है।
वर्मीज पैगोडा—भिक्षु ज्ञानेश्वर की दूरदर्शिता का प्रतीक
भिक्षु ज्ञानेश्वर ने कुशीनगर के म्यांमार बौद्ध विहार परिसर में वर्मीज पैगोडा का निर्माण कराया, जो आज एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। उनकी देखरेख में बने इस भव्य पैगोडा ने कुशीनगर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर दिया। आज देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर नमन करने आते हैं।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति और सम्मान
भदंत ज्ञानेश्वर को म्यांमार सरकार ने कई बार सम्मानित किया। उन्हें वर्ष 2021 में म्यांमार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अभिध्वजा महारथा गुरू’ प्रदान किया गया था। वे यह सम्मान प्राप्त करने वाले भारत के पहले बौद्ध भिक्षु थे। इसके अलावा उन्हें अनेक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया गया, जिसने उनके योगदान को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
धर्मप्रचार और समाजसेवा में जीवन समर्पित
भदंत ज्ञानेश्वर का पूरा जीवन बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार, शांति और करुणा के संदेश को फैलाने में व्यतीत हुआ। उन्होंने सदैव बुद्ध के विचार—“अप्प दीपो भव” (स्वयं दीप बनो)—को अपने जीवन का सिद्धांत माना। देश-विदेश में फैले उनके असंख्य शिष्य आज भी उनके दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं।
उन्होंने सदैव कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ मानवता की सेवा है, और इसी विचार के साथ उन्होंने समाज के कमजोर, वंचित और उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया।
कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष के रूप में भूमिका
कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष रहते हुए भदंत ज्ञानेश्वर ने जिले में अनेक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का संचालन किया। उनके प्रयासों से कुशीनगर में बौद्ध तीर्थ स्थलों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ा। वे सदैव भारत-म्यांमार मैत्री के प्रतीक माने जाते रहे।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उनके देहावसान के बाद से म्यांमार बौद्ध विहार, कुशीनगर में उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और बौद्ध भिक्षु वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
उनका अंतिम संस्कार 11 नवंबर 2025 को किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस अवसर पर कई देशों के बौद्ध प्रतिनिधि, राजनयिक और भिक्षु गण शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री योगी का संदेश : “उनकी शिक्षाएं पीढ़ियों को मार्ग दिखाएंगी”
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा,
“भिक्षु ज्ञानेश्वर जी का जीवन समाज को समर्पित था। उन्होंने कुशीनगर को बौद्ध जगत का केंद्र बनाया। उनकी शिक्षाएं न केवल हमें धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं, बल्कि यह भी सिखाती हैं कि सेवा ही सच्चा साधना है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगी, ताकि उनकी स्मृति सदैव अमर रहे और आने वाली पीढ़ियां उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकें।
भविष्य की प्रेरणा
भिक्षु ज्ञानेश्वर ने जो परंपरा शुरू की—शिक्षा, करुणा और धर्म का संगम—वह आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करेगा। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा धर्म वही है जो सबके कल्याण में निहित हो।
कुशीनगर की भूमि आज भी उनके योगदान से आलोकित है और भिक्षु ज्ञानेश्वर का नाम सदैव बौद्ध धर्म के स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
🕊️ “धम्मं शरणं गच्छामि… भिक्षु ज्ञानेश्वर जी, आपकी शिक्षाएं अमर रहेंगी।”
रिपोर्ट – विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर










