
विलेज फास्ट टाइम्स, जनपद कुशीनगर
दिनांक – 13 नवम्बर 2025
कुशीनगर। एक बार फिर ज़मीन के टुकड़े ने एक घर का चिराग बुझा दिया — तमकुहीराज थाना क्षेत्र के ग्राम बहिराबारी में गुरुवार को जमीनी विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। दो पट्टीदारों के बीच चल रहे पुराने विवाद ने ऐसा रूप लिया कि लाठी-डंडे और धारदार हथियार चल पड़े। चंद ही मिनटों में पूरा गांव रणभूमि में तब्दील हो गया। संघर्ष में 20 वर्षीय राकेश आर्य पुत्र राज कोकिल आर्य गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन जब तक उसे सीएचसी तमकुहीराज ले जाते, रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
सूचना पर तमकुहीराज पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। मृतक के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच जमीन के बंटवारे को लेकर लंबे समय से तनातनी चल रही थी। ग्रामीणों के अनुसार, इस विवाद की जानकारी कई बार पुलिस और प्रशासन को दी गई थी, मगर किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया — और आखिरकार यह विवाद एक जान की कीमत पर खत्म हुआ।
क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज राकेश प्रताप सिंह ने बताया कि “पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों नामजद अभियुक्तों को हिरासत में लिया है। पूछताछ जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।” वहीं गांव में घटना के बाद गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर पुलिस समय रहते हस्तक्षेप करती, तो आज एक युवक की जान बच सकती थी।
कानून व्यवस्था पर कटाक्ष – “यहाँ अपराधी जागते हैं, कानून सोता है!”
कुशीनगर में यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते कुछ महीनों में जमीनी विवादों को लेकर हुई हिंसक घटनाओं ने पुलिस की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन मामलों में पुलिस की “प्रतिक्रिया नहीं, रोकथाम की कमी” ही सबसे बड़ी वजह है। छोटे विवादों पर समय रहते कार्रवाई करने के बजाय अक्सर थानों में “समझौते” की सलाह दी जाती है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं और निर्दोषों की लाशें गिरती हैं।
स्थानीय लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा — “कुशीनगर में कानून नहीं, अपराधी जागते हैं। पुलिस हरकत में तभी आती है, जब घर उजड़ जाते हैं।”
गांव में माहौल गमगीन है। मृतक राकेश आर्य के घर कोहराम मचा है — मां की चीखें और परिजनों का रोना-पुकार गांव के हर कोने में गूंज रहा है। वहीं ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासन के प्रति साफ झलक रहा है। लोगों का कहना है कि यह हत्या पुलिस की निष्क्रियता की देन है। अगर पहले शिकायत पर कार्रवाई होती, तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।
प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल
जमीनी विवादों का यह सिलसिला कुशीनगर में लगातार बढ़ता जा रहा है। हर बार पुलिस “कड़ी कार्रवाई” और “सख्त निगरानी” के दावे करती है, लेकिन नतीजा वही— एक और परिवार उजड़ जाता है। यह स्थिति बताती है कि कानून व्यवस्था केवल कागजों में चुस्त-दुरुस्त है, जमीनी स्तर पर नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि “कुशीनगर में अपराध इसलिए नहीं बढ़ रहे कि विवाद अधिक हैं, बल्कि इसलिए कि पुलिस की सक्रियता कम है।” प्रारंभिक विवादों पर गंभीरता से काम किया जाए तो इन घटनाओं को रोका जा सकता है।
जनता की मांग — दोषियों को सख्त सजा और पुलिस जवाबदेही तय हो
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतक परिवार को उचित मुआवजा मिले और दोषियों को शीघ्र सजा दी जाए। साथ ही, क्षेत्र में पुलिस की गश्त और विवाद निवारण व्यवस्था को मजबूत किया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस केवल “घटना के बाद की कार्रवाई” में उलझी रहेगी, तब तक ऐसे रक्तरंजित अध्याय लिखे जाते रहेंगे।
कुशीनगर की यह घटना एक चेतावनी है — कि छोटी लापरवाहियाँ बड़े हादसों में बदल सकती हैं। प्रशासन चाहे जितने दावे करे, पर जब तक पुलिस की प्राथमिकता “जनसुनवाई से पहले जनसुरक्षा” नहीं बनती, तब तक यह खूनी सिलसिला थमने वाला नहीं।
अब सवाल यह है — कानून व्यवस्था कब जागेगी? जब हर विवाद की कीमत एक और जिंदगी होगी?
(रिपोर्ट — अमित कुमार कुशवाह, तमकुहीराज)
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
