
21 नवंबर, विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
ग्रामस्वामित्व बचाने के लिए प्रशासन एक्शन मोड में
कुशीनगर जनपद तमकुहीराज तहसील के ग्रामसभा खैरटिया में कथित अवैध निर्माण के मामले ने जिले के प्रशासनिक गलियारे में हलचल मचा दी है। ग्रामवासियों द्वारा उठाई गई शिकायतों के बाद जिलाधिकारी कुशीनगर महेंद्र सिंह तंवर ने गुरुवार को स्पष्ट संदेश दे दिया—“ग्रामसभा की भूमि पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे वह सत्ता-प्रभाव हो या पद की ताकत।”
पूरा मामला तब सामने आया जब ग्रामवासियों ने 13 नवंबर को कलेक्ट्रेट में एक लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि ग्राम प्रधानपति प्रशुराम सिंह ग्रामसभा की ज़मीन पर कथित तौर पर निजी भवन निर्माण करा रहे हैं, और इस निर्माण को “अन्नपूर्णा भवन” का नाम देकर वैध ठहराने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण दबंगई और प्रभाव का इस्तेमाल कर कराया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि इसके लिए न तो विभागीय स्वीकृति है और न ही कोई वित्तीय मंजूरी।
जांच में सामने आई सच्चाई—न स्वीकृति, न योजना, फिर भी जारी था निर्माण!
उप जिलाधिकारी तमकुहीराज की ओर से भेजी गई रिपोर्ट और विकास खंड सेवरही द्वारा प्रभारी अधिकारी (शिकायत) कलेक्ट्रेट को प्रेषित आख्या ने पूरे प्रकरण की सच्चाई उजागर कर दी। रिपोर्ट के अनुसार—
ग्रामसभा खैरटिया के टोला मुकुन्दछापर में अन्नपूर्णा भवन निर्माण को लेकर कोई स्वीकृत योजना मौजूद नहीं है।
विकास खंड स्तर से इस निर्माण के लिए न कोई धनराशि स्वीकृत की गई और न ही कोई प्रशासनिक अनुमति जारी की गई।
ग्राम प्रधान द्वारा दिखाया गया तर्क कि “भूमि प्रबंधक समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित है”—जिलाधिकारी ने इसे कानूनी रूप से अपर्याप्त करार दिया।
जिलाधिकारी तंवर ने दृढ़ता से कहा कि केवल समिति का प्रस्ताव पारित होना जमीन पर निर्माण शुरू करने का वैध आधार नहीं है। किसी भी ग्रामसभा भूमि पर निर्माण तभी वैध माना जाएगा जब विभागीय स्तर से दोनों—वित्तीय स्वीकृति और प्रशासनिक अनुमोदन—उपलब्ध हों।
‘धन कहां से आ रहा है?’—डीएम का बड़ा सवाल
जिलाधिकारी ने सबसे गंभीर सवाल यह उठाया कि जब विकास खंड ने कोई बजट जारी ही नहीं किया, तब निर्माण कार्य में लगाई जा रही धनराशि किस स्रोत से आ रही है। यह सवाल पूरे प्रकरण की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों में निजी भवन निर्माण की मंशा से इनकार नहीं किया जा सकता, और यदि ऐसा है तो यह ग्रामसभा की भूमि पर सीधा अवैध कब्जा माना जाएगा।
डीएम सख्त—अवैध निर्माण ढहाने की तैयारी, बेदखली का आदेश
प्रकरण को गंभीर अनियमितता मानते हुए जिलाधिकारी कुशीनगर ने तहसीलदार तमकुहीराज को निर्देश दिया है कि—
ग्रामसभा मुकुन्दछापर की आराजी संख्या 159 एवं 158 (बंजर) पर किए गए अवैध अतिक्रमण को
नियमित बेदखली की प्रक्रिया के तहत तत्काल हटाया जाए।
खेत-खलिहान, आबादी क्षेत्र या बंजर भूमि—किसी भी श्रेणी की ग्रामसभा भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट करते हुए कहा—
“ग्रामसभा की संपत्ति गांव की धरोहर है। इसे कोई भी व्यक्ति निजी लाभ के लिए नहीं हथिया सकता। कानून सभी के लिए समान है।”
ग्राम प्रधान पर बड़ी कार्रवाई—धारा 95(च) के तहत नोटिस
जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान के विरुद्ध उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 95(च) के अंतर्गत नोटिस जारी करने का आदेश भी दिया है।
यह धारा उन मामलों में लागू होती है जहां ग्राम प्रधान पर
अधिकारों के दुरुपयोग,
वित्तीय अनियमितता,
कर्तव्य-च्युत होने
या
ग्रामस्वामित्व को नुकसान पहुंचाने
का आरोप हो।
नोटिस जारी होने का मतलब है कि अब प्रधान को अपने पक्ष में ठोस प्रमाण देने होंगे, अन्यथा उनके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही तय मानी जा रही है।
ग्रामीणों ने राहत की सांस—“अब हमारी जमीन सुरक्षित रहेगी”
जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों में स्पष्ट राहत देखी जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन हस्तक्षेप न करता तो ग्रामसभा की जमीन पर निजी भवन खड़ा कर दिया जाता, और आने वाले समय में पूरा गांव अपनी साझा संपत्ति से वंचित हो जाता।
विलेज फास्ट टाइम्स का निष्कर्ष
ग्रामसभा खैरटिया का यह मामला एक बड़ा उदाहरण है कि किस प्रकार गांव की सामुदायिक संपत्ति पर कब्जे की कोशिशें अक्सर ‘योजनाओं’ की आड़ में की जाती हैं, लेकिन सजग ग्रामीणों और सतर्क प्रशासन के कारण सत्य सामने आ जाता है।
जिलाधिकारी की दृढ़ता से यह संदेश साफ है—
“ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा कोई भी कर ले—अब यह संभव नहीं।”
