
समीक्षा बैठक में डिप्टी सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा— “कार्यकर्ताओं को अधिकारी समझ लेते हैं, पर बातों को गंभीरता से लेना अभी भी उन्हें सिखाना पड़ रहा है।”
कुशीनगर। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आगमन पर प्रशासन की तैयारियों का सच उस समय पूरी तरह सामने आ गया, जब उनकी “प्रेसवार्ता” दुर्व्यवस्था की भेंट चढ़ गई। सवाल यह नहीं कि गलती किसकी है—सवाल यह है कि कुशीनगर की प्रशासनिक व्यवस्था आखिर किस दिशा में जा रही है? और क्या किसी बड़े कार्यक्रम से पहले व्यवस्था देखने वाला कोई था भी या नहीं!
डिप्टी सीएम सोमवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कुशीनगर पहुंचे। प्रोटोकॉल के मुताबिक एयरपोर्ट पर स्वागत, बौद्धमठ में दर्शन, भाजपा कार्यालय में बैठक, निर्माणाधीन कारागार का निरीक्षण और कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक तय थी। एयरपोर्ट पर विमान लैंड हुआ, स्वागत की रस्में निभीं और काफिला बौद्धमठ की ओर बढ़ गया। यहां दर्शन–पूजन के बाद भाजपा कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक सम्पन्न हुई।
इसके बाद वे सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। पार्टी कार्यकर्ताओं को अधिकारी समझकर उनकी गंभीर बातों को नज़रअंदाज़ न करने की नसीहत दिए जाने की चर्चा भी दिनभर छाई रही।
लेकिन पूरे दिन के कार्यक्रम के बाद असली तमाशा तब शुरू हुआ, जब पत्रकारों के लिए तय सभागार में “प्रेसवार्ता” का आयोजन हुआ। पत्रकार जैसे ही अंदर पहुंचे, उनके सामने नज़ारा ऐसा था, जिससे स्पष्ट लग रहा था कि किसी ने भी बैठने–बैठाने, देखने–सुनने की कोई व्यवस्था ही नहीं की।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथी कैमरे और माइक लेकर डिप्टी सीएम के चारों तरफ चिपके हुए थे, और आगे–आगे खड़े हुए नेताओं की भीड़ ने हालात ऐसे बना दिए कि पीछे रखी कुर्सियों पर बैठे पत्रकार न तो डिप्टी सीएम को देख पा रहे थे, न ही यह समझ पा रहे थे कि यह प्रेसवार्ता हो रही है या भागदौड़ में की जा रही कोई घोषणा!
खाली कुर्सियों का बड़ा हिस्सा डिप्टी सीएम की पीठ की दिशा में था, और पत्रकारों की ओर मुड़कर बात करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। करीब सात मिनट तक चली इस कथित प्रेसवार्ता में पत्रकारों के बीच सिर्फ एक ही बात की चर्चा थी—“यह प्रेसवार्ता थी या डिप्टी सीएम की ‘मन की बात’?”
कई पत्रकारों ने तंज कसते हुए कहा—“इतिहास में पहली बार प्रेसवार्ता ऐसे देख रहे हैं, जिसमें पत्रकार मौजूद हैं पर प्रेसवार्ता उनसे गायब है!”
दुर्व्यवस्था के बीच डिप्टी सीएम ने विपक्ष पर भी तीखे वार किए। बिहार में एनडीए की जीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा—“अखिलेश एंड कम्पनी प्रचंड बहुमत देखकर बौखला गई है। रामभक्तों पर गोली चलाने वाले ज्ञान न दें।”
समीक्षा बैठक पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं—
पात्र कोई भी नागरिक सूची से छूटने न पाए,
और अपात्र–घुसपैठिए किसी भी कीमत पर शामिल न हों।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि शासन की सभी योजनाओं को बिना देरी लाभार्थियों तक पहुंचाया जाए, “हर घर जल–नल” योजना में तेजी लाई जाए तथा अवैध कब्जों पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की जाए।
तालाब, पोखरे, खलिहान और बंजर भूमि पर कब्जा करने वालों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा—“किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई होगी।”
दिन–भर के कार्यक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा किसी भाषण या घोषणा की नहीं, बल्कि उन अव्यवस्थाओं की रही जिनके बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को प्रेसवार्ता करनी पड़ी।
विलेज फास्ट टाइम्स यह प्रश्न छोड़ता है—जब डिप्टी सीएम की मौजूदगी में ऐसा आलम हो सकता है, तो आम दिनों में जिले के कार्यक्रमों की स्थिति क्या होती होगी?
