

विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दिनांक — 25 नवंबर 2025
कुशीनगर।
जिले में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक उस समय सबसे अधिक तीखी हो गई, जब मा० उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अवैध कब्जों पर प्रशासन की ढिलाई को खुलकर लताड़ा। उनके शब्दों में वह कठोरता साफ झलक रही थी जो बताती है कि सरकार जमीन-जायदाद माफियाओं पर अब किसी तरह की नरमी नहीं बरतने वाली।
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया—
“तालाब, पोखरे, खलिहान, बंजर भूमि और ग्राम समाज की भूमि पर अतिक्रमण किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं। शिकायत मिलते ही तत्काल मुकदमा, तत्काल कार्रवाई— यही नीति है।”
उन्होंने प्रशासन को विशेष अभियान चलाने और सार्वजनिक संसाधनों को कब्जामुक्त कर जनता को उनका हक वापस दिलाने की चेतावनी भरे अंदाज में हिदायत दी।
लेकिन हकीकत का आईना— कुशीनगर का राजस्व विभाग ‘कब्जाधारियों का संरक्षक’?
जहां एक तरफ सरकार जीरो टॉलरेंस की दुहाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ जनसुनवाई में लगातार यह आरोप उठ रहे हैं कि कुशीनगर का राजस्व विभाग कब्जाधारियों पर मेहरबान है। शिकायत पर कार्रवाई तो दूर, कई मामलों में फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामलों को निपटा देने का खेल लंबे समय से चलता आ रहा है।
उप मुख्यमंत्री की बैठक में यह ‘मेहरबानी मॉडल’ उस समय खुलकर सामने आया जब एक पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर बैठक स्थल पहुंच गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि—
पीड़ित को उप मुख्यमंत्री तक पहुंचने भी नहीं दिया!
सुरक्षा या व्यवस्था के नाम पर उसे बाहर ही रोक दिया गया।
फरियादी इस बात से भड़के हुए थे कि अधिकारियों ने उन्हें इसलिए अंदर नहीं जाने दिया कि कहीं उप मुख्यमंत्री के सामने अधिकारियों की पोल न खुल जाए।
शिकायतकर्ताओं ने खुलकर कहा—
“कुशीनगर के राजस्व अधिकारी शिकायतें दबाने में उस्ताद हैं। फर्जी निस्तारण, झूठी रिपोर्ट और कागजों में कब्जा हटाना— यही इनका नियम बन चुका है।”
झूठी रिपोर्टों का साम्राज्य— जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त
जनपद के कई गांवों में तालाब, पोखरे, खलिहान और खाली सरकारी भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे जमे हैं।
जनता शिकायत लेकर जाती है,
जनसुनवाई पोर्टल पर आवेदन करती है,
लेकिन निचले स्तर के अधिकारी फाइल पर “निस्तारित” की मुहर लगाकर मामले को रद्द कर देते हैं।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को जमीनी हकीकत में लागू करने की जगह, राजस्व विभाग की लापरवाही और ‘सहयोग भावना’ ने हालात को और भी विस्फोटक बना दिया है।
बड़ा सवाल — क्या उप मुख्यमंत्री की सख्ती अब असर दिखाएगी?
कुशीनगर की जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि इस बार उप मुख्यमंत्री की कड़ी चेतावनी के बाद वास्तविक कार्रवाई शुरू होगी।
लेकिन लोगों में यह भी डर है कि कहीं फिर पुराने अंदाज में फाइलों में ‘सब ठीक’ दिखा कर मामले दफन न कर दिए जाएं।
फिलहाल जनता का एक ही सवाल—
“सरकार सख्त है, पर क्या स्थानीय अधिकारी सच में सुधरेंगे?”
— रिपोर्ट: विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर










