
27 नवम्बर – विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर के सेवरही क्षेत्र में बुधवार को प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली जिंक निर्माण कर किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह पर नकेल कस दी। पुलिस से मिली गुप्त सूचना के आधार पर जिला प्रशासन व कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने सेवरही–तमकुही रोड स्थित निर्माणाधीन मकान में छापेमारी कर भारी मात्रा में अपमिश्रित व नकली उर्वरक बरामद किया। यह कार्रवाई क्षेत्र में हड़कंप मचा देने वाली साबित हुई है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका ने बताया कि सूचना मिली थी कि रविशंकर प्रसाद के निर्माणाधीन मकान में पिछले कई महीनों से नकली जिंक का उत्पादन किया जा रहा है। यह मकान जून 2025 से अजय कुमार गुप्त पुत्र राधेश्याम, निवासी राजपुर वगहा, थाना सेवरही द्वारा किराये पर लिया गया था। टीम के पहुंचते ही मौके पर चल रही अवैध गतिविधियों का खुलासा हो गया। अंदर मार्बल पाउडर, कलर और अन्य सस्ते रसायनों को मिलाकर नामी कंपनियों के नाम पर जिंक तैयार किया जा रहा था, जिसका उपयोग कर किसान अपनी फसल पर गंभीर नुकसान झेल सकते थे।
छापे में बरामद सामग्री चौंकाने वाली
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि पूरा परिसर विस्तृत रूप से नकली उर्वरक उत्पादन का केंद्र बना हुआ था। टीम ने सिलाई मशीन (कैनवास बैग क्लोजर) एक अदद, चार पैकिंग मशीनें, बिजली से चलने वाली उन्नत पैकिंग मशीन, ‘पारस जिंक’ के 700 नकली पैकेट, ‘शक्तिमान जिंक’ के 314 पैकेट, ‘दयाल मोनो जिंक’ के 275 किलो, खुला जिंक 5 बैग, एसएसपी (ग्रोमोर) 3 बैग, काला दाना 13 बैग, मार्बल पाउडर के 65 बैग, सॉल्टेक्स सफेद दाना 13 बैग बरामद किए।
इसके साथ ही करीब एक डीसीएम भर खाली बोरे व पैकिंग सामग्री, 1000 से अधिक पारस जिंक के रैपर, दयाल जिंक के हजारों खाली रैपर, एक वेट मशीन, 10 लीटर फिनायल समेत बड़ी मात्रा में फर्जी पैकिंग का जखीरा मिला। अधिकारियों ने मौके से जिंक सल्फेट के चार नमूने तथा एसएसपी उर्वरक का एक नमूना विधि अनुसार सील कर जांच हेतु लिया।
अपराध गंभीर, कानून सख्त
नकली या अपमिश्रित उर्वरक का निर्माण व विक्रय उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। यह सीधे-सीधे किसानों की आजीविका, उत्पादन क्षमता और खाद्य सुरक्षा से छेड़छाड़ है।
प्रशासनिक कार्रवाई
पुलिस व कृषि विभाग की संयुक्त मौजूदगी में पूरे परिसर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। फैक्ट्री की सुरक्षा एवं अभिरक्षा का दायित्व मकान मालिक रविशंकर प्रसाद को सौंपा गया है। विभागीय अधिकारी आगे की विधिक कार्रवाई को अंतिम रूप दे रहे हैं, जिसमें संबंधित व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई तय है।
इस कार्रवाई से क्षेत्र में संदेश गया है कि किसानों के साथ छल करने वालों पर प्रशासन अब किसी भी कीमत पर नरमी नहीं बरतेगा।
