
29 नवंबर • विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर के रामकोला। क्षेत्र अंतर्गत में प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सुर्खियों में आए मां गीतांजलि हॉस्पिटल पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उसका पंजीकरण निरस्त कर दिया है। मृतका पूनम देवी, पत्नी महेंद्र कुशवाहा, निवासी सोहरौना की मौत के बाद उठे सवालों के बीच जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी गहन पड़ताल की रिपोर्ट 28 नवंबर 2025 को प्रस्तुत की, जिसमें गंभीर लापरवाही की पुष्टि की गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा डीएम को सौपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि समिति—जिसमें डॉ. अवधेश प्रसाद (उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी), डॉ. शेष कुमार विश्वकर्मा (प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी रामकोला) एवं डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता (बाल रोग विशेषज्ञ, सीएचसी रामकोला) शामिल थे—ने घटनास्थल का निरीक्षण, चिकित्सकीय दस्तावेजों की समीक्षा तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए।
रिपोर्ट के अनुसार हॉस्पिटल संचालक अरविन्द कुमार शर्मा, इंचार्ज डॉ. मीरा शर्मा, सर्जन डॉ. विकास मंडलोई और आशा कार्यकर्ता मजहरून्निशा की भूमिका में अनेक गंभीर चूकें पाई गईं। समिति ने स्पष्ट कहा कि प्रसूता को समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया, आवश्यक चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ और हालत बिगड़ने के बावजूद रेफरल एवं आपात व्यवस्था में देरी बरती गई, जिससे प्रसूता की जान नहीं बच सकी।
जांच समिति ने यह भी माना कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा मानकों तथा चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के अनुपालन में भारी अनियमितताएँ थीं, जो सीधे तौर पर मानव जीवन के साथ खिलवाड़ का गंभीर उदाहरण है।
इन्हीं तथ्यों के मद्देनज़र समिति ने सख्त संस्तुति की कि जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण की अनुमति के उपरांत मां गीतांजलि हॉस्पिटल, रामकोला का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े। साथ ही, दोषियों के विरुद्ध क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट–2010 के अंतर्गत कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी अनुशंसा की गई है।
प्रशासन की इस निर्णायक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति है, वहीं पीड़ित परिवार ने न्याय की उम्मीद से राहत की सांस ली है।
