

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
कुशीनगर से बड़ी और दर्दनाक खबर—
कुशीनगर जनपद के पड़रौना छावनी स्थित न्यू लाइफ़ अस्पताल का नाम भले ही “लाइफ़” यानी ज़िंदगी का प्रतीक हो, लेकिन हकीकत में यहाँ ज़िंदगी की कीमत कितनी सस्ती है, यह आज रोते-बिलखते परिजनों की चीखें बयां कर रही हैं। अस्पताल की लापरवाही ने एक महिला की जान ले ली—और पीछे छोड़ दिया सवालों का ऐसा तूफ़ान, जिसके जवाब शायद किसी के पास नहीं।
बीती रात महिला का ऑपरेशन किया गया। परिवार ने उम्मीदों से भरी निगाहों से डॉक्टरों को सौंपा था—लेकिन सुबह होते-होते घर में उम्मीद नहीं, मातम लौट आया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि ऑपरेशन के बाद हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने न तो गंभीरता दिखाई और न ही समय पर सही उपचार दिया। परिजनों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्टाफ की लापरवाही और उदासीनता ने उनकी प्रिय को मौत की दहलीज तक पहुंचा दिया।
परिवार का दर्द साफ कहता है—
“जब अस्पताल ही भरोसे की जगह खतरा बन जाए, जब जिंदगी बचाने वाले ही जिम्मेदारी से भागने लगें, तो मरीज इलाज कराए या किस्मत आजमाए?”
न्यू लाइफ़ अस्पताल के बाहर महिलाओं की चीखें, रोते बच्चे और टूट चुके परिवार उस कठोर सच्चाई को उजागर कर रहे हैं कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कई जगह सिर्फ व्यावसायिकता बची है, संवेदनशीलता नहीं। सवाल यह भी है कि आखिर कब तक अस्पतालों की कथित लापरवाहियों का पोस्टमार्टम परिवारों के आंसुओं से होता रहेगा? और कब तक ऐसे हादसे सिस्टम की नाकामी पर काला धब्बा बनकर सामने आते रहेंगे?
स्थानीय लोगों में भी गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जिले में लगातार निजी अस्पतालों की अनियमितता के कई मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल कागज़ों में सिमटी रहती है। अगर समय रहते सख्त कदम उठाए गए होते, तो शायद आज यह परिवार अपनी बेटी-बहू-मां को खोने के दर्द से नहीं गुजर रहा होता।
फिलहाल परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
विलेज फास्ट टाइम्स इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
