
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर — 05 दिसम्बर
कुशीनगर में गन्ना सीज़न अपने चरम पर है और इसी बीच जिला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा व दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बाद जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी ने सभी अध्यासी, प्रधान प्रबंधकों तथा कुशीनगर की सभी चीनी मिलों—पिपराइच (गोरखपुर) व गड़ौरा (महराजगंज)—को कड़े आदेश जारी किए हैं कि अब किसी भी गन्ना ढुलाई वाहन का तौल तभी होगा, जब उस पर रिफ्लेक्टर पट्टी/टेप लगी हो।
गन्ना ढुलाई में लगे ट्रैक्टर, ट्रॉली, ट्रक आदि अंधेरी रातों और कोहरे भरी सुबहों में लगातार सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ऐसे में रिफ्लेक्टर न होने के कारण बड़ी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। प्रशासन ने इस गंभीरता को भांपते हुए अब सख्त ‘नो रिफ्लेक्टर – नो तौल’ नीति लागू कर दी है। यानी अब बिना रिफ्लेक्टर वाला वाहन मिल गेट से लौटाया जाएगा।
जिला गन्ना अधिकारी ने निर्देशित किया है कि सभी मिल गेट और बाह्य क्रय केंद्रों पर बड़े-बड़े नोटिस बोर्ड लगाए जाएँ, जिन पर साफ लिखा हो—
“रिफ्लेक्टर नहीं तो गन्ना तौल नहीं”
इसके साथ ही हर मिल गेट व क्रय केंद्र पर रिफ्लेक्टर टेप की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि किसान या चालक को सुविधा मिल सके और मौके पर ही रिफ्लेक्टर लगाकर तौल कराया जा सके।
अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि इस आदेश में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सभी गन्ना ढुलाई वाहनों पर 100% रिफ्लेक्टर अनिवार्य है। यदि कोई वाहन बिना रिफ्लेक्टर आता है तो पहले उस पर पट्टी लगाई जाएगी, उसके बाद ही तौल की अनुमति दी जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि इससे न सिर्फ दुर्घटनाएँ कम होंगी, बल्कि किसानों व आम जनता की सुरक्षा भी और मजबूत होगी।
गन्ना किसानों और ट्रांसपोर्टरों में इस आदेश को लेकर तेजी से चर्चा है और लोग इसे सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी और सराहनीय कदम बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, कुशीनगर प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है —
“सुरक्षा पहले… नहीं रिफ्लेक्टर, तो नहीं तौल!”
