
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दिनांक – 06 दिसंबर 2025
तमकुही राज तहसील में महीने के अंतिम शनिवार को लगने वाला तहसील समाधान दिवस इस बार पूरी तरह से प्रशासनिक अव्यवस्था और लापरवाही का साक्षात नमूना बन गया। रोस्टर के मुताबिक कुशीनगर के डीएम को खुद अध्यक्षता करनी थी—फरियाद सुननी थी, समाधानों पर मुहर लगानी थी—लेकिन न नज़ारा दिखा, न भरोसा बचा।
सुबह होते ही दर्जनों फरियादी दूर-दराज़ के गांवों से उम्मीदों का बोझ उठाए तहसील पहुँचे। हर किसी की नजर सिर्फ एक ही दरवाज़े पर—“साहब कब आएंगे?”
लेकिन वक्त गुजरता गया, घड़ियां बदलती गईं, और प्रशासन की चुप्पी फरियादियों की उम्मीदों पर हथौड़े की तरह गिरती रही।
दो टूक कहें तो—लोगों की उम्मीदें वहीं तहसील के बरामदे में दम तोड़ गईं।
और फिर सबसे कड़वी खबर आई—
“डीएम साहब आज नहीं आ रहे!”
बस… इतना सुनते ही पूरा माहौल जैसे सूना पड़ गया। कई घंटे इंतजार करने के बाद फरियादियों के हाथ केवल मायूसी और असहायता लगी।
फरियादियों ने खुलकर नाराज़गी जताई—
“जब समाधान दिवस में ही समाधानकर्ता नहीं आए, तो हमारी लड़ाई कौन सुनेगा?”
लोगों के चेहरों पर गुस्सा साफ पढ़ा जा सकता था। प्रशासन की इस लापरवाही पर सवाल सिर्फ उठे नहीं—बल्कि गूंजे।
इधर तमकुही में अव्यवस्था… उधर देवरिया में दिनांक 6 /12/2025को (प्रशासन पर गिरेगी गाज!
06 दिसंबर को देवरिया में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति की अत्यंत महत्वपूर्ण, धारदार और कड़क समीक्षा बैठक होने जा रही है। इस बैठक ने देवरिया ही नहीं, कुशीनगर प्रशासन में भी घबराहट फैला दी है।
सूत्रों के अनुसार समिति इस बार सिर्फ कागज़ों का मेकअप नहीं देखेगी—
बल्कि जमीनी नाकामी, असल व्यवस्था, भ्रष्टाचार की बू, और विभागों की लापरवाही पर सीधा प्रहार करेगी।
प्रशासनिक दफ्तरों में आज का दिन अफरा-तफरी में बीता—
फाइलें झाड़-पोंछ कर बाहर निकाली गईं, दौड़भाग बढ़ी, अचानक मीटिंगें बुलाई गईं, और अधिकारियों ने अपनी कुर्सियां और टाईट कर लीं। इस कड़क समीक्षा ने कई अफसरों की रातों की नींद उड़ा दी है।
कहने को तो यह ‘समीक्षा’ है…
लेकिन लापरवाह विभागों के लिए यह कठोर चेतावनी और संभावित गाज बनकर सामने आती दिख रही है।
जनता भी चाहती है कि इस बार समिति सिर्फ रिपोर्ट न सुने—
बल्कि उस लापरवाह सिस्टम को झकझोर दे, जो तहसीलों में गरीबों को घंटों खड़ा रखकर भी सुनवाई तक नहीं करता।
आज का सवाल, कड़वा लेकिन सच—
“जब शीर्ष अधिकारी ही समाधान दिवस में जनता के बीच न पहुंचें, तो नीचे के अधिकारी किसकी सुनेंगे?”
विलेज फास्ट टाइम्स प्रशासन को साफ संदेश देता है—
**फरियादियों की उपेक्षा अब बंद हो!
वरना जनता का उठता आक्रोश कल की समिति से भी बड़ा तूफान बनकर उठेगा।**
यही चेतावनी है—और यही जनता की आवाज है।
