
विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
कुशीनगर: विकास खण्ड नेबुआ नौरंगिया के ग्राम पंचायत सिरसिया बुजुर्ग का खेल मैदान इन दिनों बदहाली की ऐसी मार झेल रहा है कि खिलाड़ियों का मनोबल ही टूटने लगा है। गांव के युवाओं की प्रतिभा को निखारने तथा ग्रामीण क्षेत्र में खेलों को बढ़ावा देने के सरकारी दावे अब सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि जिस मैदान पर कभी बच्चों की खिलखिलाहट और युवाओं के जोश की गूंज रहती थी, आज वह मैदान घास-फूस और जंगली झाड़ियों से भरकर वीरान पड़े बंजर जमीन जैसा नजर आ रहा है।
मौके पर देखने से साफ हो जाता है कि बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी ने इस मैदान की उपयोगिता लगभग खत्म कर दी है। चारों ओर फैली जंगली घास और झाड़ियां न सिर्फ खिलाड़ियों के अभ्यास में बाधा बन रही हैं, बल्कि खेल भावना को भी ठेस पहुंचा रही हैं। मैदान में जगह-जगह बने गड्ढे किसी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। वहीं खेल उपकरणों का हाल तो और भी दयनीय है—कई उपकरण टूट चुके हैं, कुछ जर्जर हालत में पड़े हैं और कई का तो पता ही नहीं है कि वे कहां गायब हो गए।
सरकार की ओर से गांव-गांव खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर मैदान विकसित करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सिरसिया बुजुर्ग का मैदान इन दावों की पोल खोलता नजर आता है। खेल संसाधनों का अभाव, अभ्यास के लिए असुरक्षित वातावरण, और पूरी तरह उपेक्षित प्रबंधन यह साबित कर रहा है कि विकास योजनाएं सिर्फ फाइलों में ही दम तोड़ रही हैं।
स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें अभ्यास के लिए उपयुक्त स्थान ही नहीं मिल पा रहा है। फुटबॉल, कबड्डी, एथलेटिक्स जैसे खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं यहां लगभग न के बराबर हैं। कई युवा खिलाड़ियों ने बताया कि वे बड़े सपने लेकर मैदान में उतरते हैं, लेकिन टूटी हुई संरचनाएं और जर्जर उपकरण देखकर उनका उत्साह ठंडा पड़ जाता है। गांव के लोग भी मानते हैं कि यदि सरकारी स्तर पर थोड़ी भी गंभीरता दिखाई गई होती, तो यह मैदान आज खिलाड़ियों की प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता था।
युवाओं में गहरा आक्रोश है कि सरकारी योजनाओं में लाखों-करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद मैदान का हाल ऐसा क्यों है? क्या विकास सिर्फ कागजों पर ही हो रहा है? यह सवाल ग्रामीणों के मन में लगातार उठ रहा है। उनका कहना है कि अगर फंड का सही उपयोग किया गया होता, तो सिरसिया बुजुर्ग का मैदान किसी मॉडल प्लेग्राउंड से कम नहीं होता।
कुल मिलाकर सिरसिया बुजुर्ग का खेल मैदान आज बदइंतजामी और उपेक्षा का शिकार है। ग्रामीणों और खिलाड़ियों की मांग है कि प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर मैदान की साफ-सफाई, लेवलिंग, सुरक्षा तथा खेल उपकरणों की व्यवस्था कराए, ताकि युवा खिलाड़ी एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
जब सरकार खेल महोत्सवों और स्पोर्ट्स एरिया में करोड़ों झोंक रही है, तब गांवों के ये मैदान बदहाली की चादर ओढ़े पड़े हैं—यह तस्वीर ग्रामीण विकास की हकीकत बयां करती है।
