
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
कुशीनगर। किसानों की तरक्की और उनके खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। पडरौना विकासखंड के राजस्व ग्राम खुदरा में स्थित 41 नंबर पीजी नलकूप किसानों के लिए सहारा नहीं, बल्कि जानलेवा खतरा बन चुका है। रबी की फसल बीच सीजन में खड़ी है, लेकिन सरकारी सिस्टम की उदासीनता किसानों के सपनों पर बुरी तरह पानी फेर रही है।
नलकूप की हाल— मौत को दावत देते नंगे तार, टूटा दरवाजा, झाड़ियों से ढका परिसर
गांव के इस नलकूप की हालत देख लगता है मानो कोई सुनसान खंडहर हो। भवन के भीतर बिखरे हुए नंगे और खुले विद्युत तार किसी बड़े हादसे का इंतजार करते दिखते हैं। मुख्य द्वार के ऊपर लगा लोहे का बरचा टूटकर गिर चुका है, जिससे पूरी इमारत खतरे का केंद्र बनी हुई है। परिसर के भीतर और बाहर तक इतनी घनी झाड़ियां फैल चुकी हैं कि भीतर जाने के लिए रास्ता तक साफ नहीं बचा।
नालियां पूरी तरह झाड़ियों और गाद से पटी हैं, जिससे पानी खेतों तक पहुंचने की कोई संभावना नहीं है। जो नलकूप किसानों के लिए जीवनदायिनी धारा बहाने को बना था, वही आज दम तोड़ता नजर आ रहा है।
मशीन की टेस्टिंग भी नहीं, ऑपरेटर लापता— कौन चलाए मोटर?
सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरे सीजन बीत जाने को है, लेकिन नलकूप मशीन की टेस्टिंग तक नहीं की गई। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब अंदर मौत को दावत देते नंगे तार लटक रहे हैं और कोई ऑपरेटर मौजूद ही नहीं है, तो आखिर वे सिंचाई के लिए मोटर कैसे चलाएँ? और अगर कोई अनहोनी होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा?
जब इस संबंध में नलकूप ऑपरेटर से बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी से बचते हुए कहा— “ऊपर बात कीजिए… हम क्या करें।”
वहीं जेई दिग्विजय मिश्रा से संपर्क की कोशिशें की गईं, लेकिन उन्होंने फोन उठाने के बजाय कॉल काट दिया। ग्रामीणों में इस रवैये को लेकर गहरा आक्रोश है।
गेहूं की फसल सूखने की कगार पर— किसान बोले: अधिकारी सो रहे हैं
खुदरा गांव के किसान समय से गेहूं की बोआई कर चुके हैं और अब पहली सिंचाई की सख्त जरूरत है। खेतों की नमी लगातार घट रही है, फसल पर सूखे का खतरा मंडराने लगा है।
किसान विनोद, रामकुमार और रमेश ने बताया—
“सरकारी नलकूप सिर्फ कागजों में चल रहा है। यहां अधिकारी महीनों से झांकने तक नहीं आए। सिंचाई नहीं हो रही है, फसल पिछड़ रही है, और जिम्मेदार भाग रहे हैं।”
किसानों की मांग— तत्काल सफाई, मरम्मत और मशीन टेस्टिंग हो
गांव के लोग मांग कर रहे हैं कि नलकूप परिसर की तत्काल सफाई करवाई जाए, नालियों को दुरुस्त किया जाए और सबसे पहले मशीन की टेस्टिंग हो। अगर समय रहते सिंचाई बहाल नहीं हुई, तो गांव की सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो सकती है।
कुल मिलाकर खुदरा गांव का 41 नंबर पीजी नलकूप लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। किसान इंतजार में हैं कि कोई अधिकारी जागे और उनके खेतों तक पानी पहुंचे— वरना इस रबी सीजन में उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।



