
10 दिसंबर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर।
खड्डा ब्लॉक परिसर आज प्रशासनिक जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनशीलता का अनोखा संगम बना रहा, जब दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा आयोजित विशाल वितरण शिविर में सैकड़ों की मौजूदगी के बीच दिव्यांगजन हितों को केंद्र में रखते हुए जनकल्याण की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे माननीय विधायक खड्डा श्री विवेकानन्द पाण्डेय की उपस्थिति ने शिविर को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।
शिविर में 110 दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल और 10 स्मार्ट केन वितरित की गईं—परंतु यह संख्या जितनी प्रेरणादायक दिखती है, उतनी ही प्रशासनिक तंत्र की वास्तविक चुनौतियों को भी उजागर करती है। क्षेत्र में पंजीकृत दिव्यांगजनों की संख्या की तुलना में यह वितरण अभी भी ‘न्याय के प्रारंभिक पड़ाव’ जैसा प्रतीत होता है। सवाल यह भी उठता है कि जब सरकार द्वारा करोड़ों की योजनाएं चल रही हैं, तो लाभार्थियों तक इन उपकरणों का समय पर और व्यापक स्तर पर वितरण क्यों नहीं हो पा रहा है?
शिविर में उपस्थित जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी अभय पाण्डेय, खण्ड विकास अधिकारी प्रहलाद सिंह तथा विभागीय कर्मियों ने योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी। परंतु यह हकीकत किसी से छिपी नहीं कि अधिकांश लाभार्थी आज भी प्रक्रियाओं की जटिलता, प्रमाणपत्रों की देरी और विभागीय लापरवाहियों के कारण महीनों चक्कर लगाने को मजबूर हैं। ऐसे में आज का आयोजन प्रशासन की संवेदनशीलता को उजागर तो करता है, लेकिन सिस्टम की धीमी रफ्तार का आईना भी दिखाता है।
माननीय विधायक ने कहा कि दिव्यांगजन समाज की शक्ति हैं, लेकिन जब तक स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता, समयबद्धता और जिम्मेदारी नहीं सुनिश्चित होगी, तब तक ऐसे शिविर केवल ‘औपचारिकताएं’ बनकर रह जाएंगे। उनकी यह टिप्पणी प्रशासनिक अमले के लिए सीधी और कड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
आज का शिविर न केवल राहत देने वाला रहा, बल्कि यह भी स्पष्ट कर गया कि सरकार की मंशा नेक हो सकती है, पर ज़मीनी तंत्र की सुस्त चाल जनता को अभी भी परेशानियों की राह पर धकेल रही है। अब देखना यह है कि व्यवस्था इन कमियों से सबक लेकर वास्तव में दिव्यांगजनों के चेहरों पर स्थायी मुस्कान ला पाती है या नहीं।




